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Jammu News: दो दशक पहले प्रमाणपत्र में जन्मतिथि बदली, अब मिली सात साल कैद
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- पुलवामा की एक अदालत ने पूर्व जूनियर इंजीनियर को सुनाई सजा, 3,52,760 रुपये का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पुलवामा की एक अदालत ने वीरवार को ग्रामीण विकास विभाग के एक पूर्व जूनियर इंजीनियर को अपनी जन्मतिथि में पांच साल की हेराफेरी करने के आरोप में सात साल की कैद की सजा सुनाई।
विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायाधीश पुलवामा, डॉ. नूर मोहम्मद मीर ने दोषी सोनाउल्लाह वानी (अब 80 साल के बुजुर्ग) पर मुकदमा शुरू होने के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद कई अपराधों का दोषी पाते हुए 3,52,760 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 2000 में तत्कालीन कश्मीर सतर्कता संगठन जो अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो है, ने एक शिकायतकर्ता के आधार पर दर्ज किया था। जांच के दौरान, वीओके ने वानी का मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड को भेजा था और उसकी वास्तविक जन्मतिथि 8 जून 1945 के बजाय 8 जून 1940 होने की पुष्टि की थी।
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वानी की सेवा पुस्तिका भी जम्मू-कश्मीर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला श्रीनगर भेजी गई थी जहां पुष्टि हुई कि उसका पहला पृष्ठ फाड़कर नया पृष्ठ लगाया गया था। इसके अलावा, जन्मतिथि सहित सभी प्रविष्टियां फर्जी पाई गईं जो वानी ने स्वयं अपने हाथों से लिखी थीं।
जांच से पता चला कि वानी ने अपनी वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि यानी 30 जून 1998 से 21 महीने तक विभाग में धोखाधड़ी से रहकर राज्य के खजाने को 2,62,760 रुपये का नुकसान पहुंचाया। वानी का वेतन अप्रैल 2000 में रोक दिया गया था।
2003 में वानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दायर किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद, अदालत ने वानी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि दोषी व्यक्ति ने एक लोक सेवक के रूप में, सरकारी धन (वेतन) की अवैध रूप से हेराफेरी करने और एक ऐसे सार्वजनिक पद पर आसीन होने के लिए सरकारी दस्तावेज में जालसाजी की, जिसके वह पात्र नहीं थे।
अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक रूप है। यह कोई मामूली या पीड़ित-रहित अपराध नहीं है। हालांकि वानी की बढ़ती उम्र को देखते हुए अदालत ने उसे धारा 467 आरपीसी के तहत अपराध के लिए सात साल के साधारण कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि जुर्माना न चुकाने पर उसे छह महीने और साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी
धारा 471 आरपीसी के तहत अपराध के लिए वानी को पांच साल के साधारण कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न चुकाने पर अदालत ने आदेश दिया कि उसे तीन महीने और साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। वहीं आरपीसी की धारा 420 के तहत अपराध के लिए अदालत ने उसे पांच साल के साधारण कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।
तीन साल के साधारण कारावास की सजा
जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2006 की धारा 5 (2) के तहत अपराध के लिए दोषी को तीन साल के साधारण कारावास और 2,62,760 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही, इस अपराध के लिए जुर्माने की राशि दोषी द्वारा अर्जित गलत लाभ 2,62,760 रुपये के बराबर निर्धारित की जाती है ताकि राज्य के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। इस जुर्माने का भुगतान न करने पर दोषी को छह महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। अदालत ने आदेश दिया कि कारावास की सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी। इस प्रकार कारावास की प्रभावी अवधि सात वर्ष होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पुलवामा की एक अदालत ने वीरवार को ग्रामीण विकास विभाग के एक पूर्व जूनियर इंजीनियर को अपनी जन्मतिथि में पांच साल की हेराफेरी करने के आरोप में सात साल की कैद की सजा सुनाई।
विशेष भ्रष्टाचार निरोधक न्यायाधीश पुलवामा, डॉ. नूर मोहम्मद मीर ने दोषी सोनाउल्लाह वानी (अब 80 साल के बुजुर्ग) पर मुकदमा शुरू होने के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद कई अपराधों का दोषी पाते हुए 3,52,760 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 2000 में तत्कालीन कश्मीर सतर्कता संगठन जो अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो है, ने एक शिकायतकर्ता के आधार पर दर्ज किया था। जांच के दौरान, वीओके ने वानी का मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड को भेजा था और उसकी वास्तविक जन्मतिथि 8 जून 1945 के बजाय 8 जून 1940 होने की पुष्टि की थी।
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वानी की सेवा पुस्तिका भी जम्मू-कश्मीर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला श्रीनगर भेजी गई थी जहां पुष्टि हुई कि उसका पहला पृष्ठ फाड़कर नया पृष्ठ लगाया गया था। इसके अलावा, जन्मतिथि सहित सभी प्रविष्टियां फर्जी पाई गईं जो वानी ने स्वयं अपने हाथों से लिखी थीं।
जांच से पता चला कि वानी ने अपनी वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि यानी 30 जून 1998 से 21 महीने तक विभाग में धोखाधड़ी से रहकर राज्य के खजाने को 2,62,760 रुपये का नुकसान पहुंचाया। वानी का वेतन अप्रैल 2000 में रोक दिया गया था।
2003 में वानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दायर किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद, अदालत ने वानी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि दोषी व्यक्ति ने एक लोक सेवक के रूप में, सरकारी धन (वेतन) की अवैध रूप से हेराफेरी करने और एक ऐसे सार्वजनिक पद पर आसीन होने के लिए सरकारी दस्तावेज में जालसाजी की, जिसके वह पात्र नहीं थे।
अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक रूप है। यह कोई मामूली या पीड़ित-रहित अपराध नहीं है। हालांकि वानी की बढ़ती उम्र को देखते हुए अदालत ने उसे धारा 467 आरपीसी के तहत अपराध के लिए सात साल के साधारण कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि जुर्माना न चुकाने पर उसे छह महीने और साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी
धारा 471 आरपीसी के तहत अपराध के लिए वानी को पांच साल के साधारण कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न चुकाने पर अदालत ने आदेश दिया कि उसे तीन महीने और साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। वहीं आरपीसी की धारा 420 के तहत अपराध के लिए अदालत ने उसे पांच साल के साधारण कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।
तीन साल के साधारण कारावास की सजा
जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2006 की धारा 5 (2) के तहत अपराध के लिए दोषी को तीन साल के साधारण कारावास और 2,62,760 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही, इस अपराध के लिए जुर्माने की राशि दोषी द्वारा अर्जित गलत लाभ 2,62,760 रुपये के बराबर निर्धारित की जाती है ताकि राज्य के खजाने को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। इस जुर्माने का भुगतान न करने पर दोषी को छह महीने के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी। अदालत ने आदेश दिया कि कारावास की सभी मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी। इस प्रकार कारावास की प्रभावी अवधि सात वर्ष होगी।