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सरकारी फरमान के इंतजार में लटकी जम्मू-कश्मीर की ‘खेल नीति’, स्पोर्ट्स को नहीं मिल पा रहा बढ़ावा

Mon, 08 Apr 2019 02:17 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Mon, 08 Apr 2019 02:17 PM IST
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sports policy for jammu kashmir could not for due to government failure
सांकेतिक तस्वीर
जम्मू-कश्मीर में अकसर नेता और अधिकारी युवाओं को स्पोर्ट्स में भविष्य बनाने की बात कहते दिखते हैं। मगर स्पोर्ट्स में भविष्य बनने का सपना युवाओं के लिए किसी अंधेरे में जाने से कम नहीं है। इसका मुख्य कारण है राज्य में स्पोर्ट्स पॉलिसी यानी खेल नीति का प्रभावी ढंग से लागू नहीं होना। स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा बनाई खेल नीति सरकार की अनदेखी की शिकार है। पिछले वर्ष तैयार की गई नीति को लागू करने में देरी का जवाब खेल विभाग के पास भी नहीं है। 
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दरअसल खेल नीति के लागू नहीं होने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाड़ियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। सरकार ने कई स्पोर्ट्स पालिसी को लागू करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन केवल कागजों तक सीमित रही। इसके कारण खेल के बुनियादी ढांचे का अभाव के साथ खिलाड़ियों की प्रतिभा को पर्याप्त मंच नहीं मिल रहा है। 
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खेल नीति के अभाव के कारण पिछले चार साल में राज्य के हर जिले में बनने वाले इंडोर स्टेडियम का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया। स्पोर्ट्स काउंसिल से जुड़ी एसोसिएशन को पर्याप्त फंड तक नहीं मिलता है, जिससे खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर भी असर पढ़ता है। इस संबंध में जब खेल विभाग के सेक्रेटरी समरद हाफिज से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन का जवाब नहीं दिया।
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'स्पोर्ट्स पालिसी का नहीं होना खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है। खिलाड़ियों को उनकी मेहनत का फल नहीं मिलता है। स्पोर्ट्स पालिसी के अभाव के कारण ही राज्य में खेल ढांचे की कमी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक विजेताओं को नहीं के बराबर प्रोत्साहन मिलता है। खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण के लिए जाना पढ़ता है। इससे खिलाड़ियों को काफी खर्च उठाना पड़ता है।'- राम खजूरिया, माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के जरनल सेक्रेटरी

'स्पोर्ट्स पर हर सरकार का रवैया असंवेदनशील रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक लाने की बातें तो होती है, लेकिन यहां स्पोर्ट्स ढांचे ना के बराबर हैं। स्पोर्ट्स पालिसी का अभाव युवाओं को स्पोर्ट्स से दूर कर सकता है। अपनी मेहनत के दम पर राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारों की ओर से प्रोत्साहन नहीं मिलता है। राज्यपाल शासन में कुछ हद तक स्पोर्ट्स के ढांचे में सुधार हुआ।' - सब इंस्पेक्टर, रशीद अहमद चौधरी, शेर-ए-कश्मीर अवार्ड विजेता 

कोई पूछता है नौकरी मिली तो बात घुमा देता हूं : भानू

18वीं एशिया गेम्स में वुशु में कांस्य पदक लाने वाले भानु प्रताप सिंह ने कहा जब अन्य खिलाड़ी उनसे पूछते हैं कि क्या आपको नौकरी मिली, तो बातों को घुमा-फिरा कर जवाब देना पड़ता है। मैं नहीं चाहता कि किसी खिलाड़ी का मनोबल कम हो। राज्य सरकार को खिलाड़ियों के भविष्य के प्रति सोचना होगा। मेरे साथ अन्य राज्यों के खिलाड़ियों को नौकरी मिल गई है। क्यों सरकार राज्य में खेल नीति लागू नहीं कर पा रही है। 
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