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स्पेशल डीजी का बड़ा बयान, अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:46 PM IST
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सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी सीआरपीएफ (जेएंडके जोन) वीएसके कौमुदी ने कहा है कि आतंकी इस बार भी अमरनाथ यात्रा में खलल डाल सकते हैं। हालांकि सीआरपीएफ हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। आतंकियों के नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
श्रीनगर के हुमहामा स्थित सीआरपीएफ के आरटीसी में शौर्य दिवस कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से उन्होंने कहा कि हम कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश में
जुटे हैं।
सीआरपीएफ कई ऐसे प्रोग्राम आयोजित कर रही है जिससे उन्हें सही दिशा देकर समाज के उत्थान में लगाया जा सके। इससे पहले शौर्य दिवस समारोह में स्पेशल डीजी ने
जवानों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें देश की एकता व अखंडता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में स्पेशल डीजी के अलावा आईजी सीआरपीएफ (ऑपरेशंस) जुल्फिकार हसन, आईजी सीआरपीएफ रविदीप सिंह साही, डीआईजी श्रीनगर (साउथ रेंज) डॉ संजय भी मौजूद रहे। सीआरपीएफ हर साल नौ अप्रैल को शौर्य दिवस मनाती है।
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श्रीनगर के हुमहामा स्थित सीआरपीएफ के आरटीसी में शौर्य दिवस कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से उन्होंने कहा कि हम कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश में
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जुटे हैं।
सीआरपीएफ कई ऐसे प्रोग्राम आयोजित कर रही है जिससे उन्हें सही दिशा देकर समाज के उत्थान में लगाया जा सके। इससे पहले शौर्य दिवस समारोह में स्पेशल डीजी ने
जवानों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें देश की एकता व अखंडता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए प्रेरित किया।
समारोह में स्पेशल डीजी के अलावा आईजी सीआरपीएफ (ऑपरेशंस) जुल्फिकार हसन, आईजी सीआरपीएफ रविदीप सिंह साही, डीआईजी श्रीनगर (साउथ रेंज) डॉ संजय भी मौजूद रहे। सीआरपीएफ हर साल नौ अप्रैल को शौर्य दिवस मनाती है।
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इस दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया जाता है। इसी दिन 1965 में गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित सरदार चौकी (जिसकी रक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन की दो कंपनियों ने संभाल रखी थी) पर पाक की सेना की एक पूरी ब्रिगेड ने हमला किया था।
टैंकों व अन्य भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी सेना के हमले को सीआरपीएफ के जवानों ने पूरी तरह नाकाम बनाया। इस दौरान 34 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और चार जिंदा पकड़े गए। 12 घंटे तक चले इस भीषण युद्ध में सीआरपीएफ के छह जवान भी शहीद हो गए थे।
सरदार चौकी पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके बलिदान व शौर्य से प्रेरणा लेने के लिए ही हर साल शौर्य दिवस मनाया जाता है।
टैंकों व अन्य भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी सेना के हमले को सीआरपीएफ के जवानों ने पूरी तरह नाकाम बनाया। इस दौरान 34 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और चार जिंदा पकड़े गए। 12 घंटे तक चले इस भीषण युद्ध में सीआरपीएफ के छह जवान भी शहीद हो गए थे।
सरदार चौकी पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके बलिदान व शौर्य से प्रेरणा लेने के लिए ही हर साल शौर्य दिवस मनाया जाता है।