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भूकंप की अफवाह ने शहरवासियों की उड़ाई नींद
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 08 Sep 2014 01:09 AM IST
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तड़के चार बजे जानीपुर इलाके में रहने वाली बंतो देवी अपने नन्हे बच्चों को लेकर अचानक सड़क पर निकल आई। बच्चों की आंखों में नींद, लेकिन डर से वह रो रहे थे। महिला इलाके के अन्य लोगों को भी घरों से बाहर निकलने को कहती रही। देखते ही देखते इलाके के सभी लोग सड़कों पर निकल आए।
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लोग अपने घर के बुजुर्गों को भी सहारा देकर घर से बाहर ले आए। सभी की जुबां पर एक ही सवाल था? क्या भूकंप आया? कोई कह रहा था कि दिल्ली से उसके रिश्तेदार ने फोन किया है, तो कोई कह रहा था कि जम्मू के ही पहचान के व्यक्ति का फोन आया है। सभी के चेहरों पर डर ऐसा कि घर में घुसने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे।
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यह हाल सिर्फ जानीपुर इलाके का नहीं था, बल्कि शहर के तमाम हिस्सों में लोग अपने घरों को छोड़ बाहर निकल आए थे। चार दिन की मूसलाधार बारिश और बाढ़ से राहत पाने पर शहरवासियों ने रविवार गहरी नींद सोने का प्रोग्राम बनाया था लेकिन देर रात अचानक भूकंप की अफवाह ने पूरे शहर की नींद उड़ा दी।
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रात को दरकिनार कर हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर दौड़ने लगा। हजारों लोगों ने भूकंप के डर से घंटों सड़कों पर रात गुजारी। दिन की रोशनी होने पर ही राहत की सांस मिली। दिनभर भूकंप की अफवाह चर्चा का विषय रही।
भूकंप की अफवाह का सिलसिला रविवार देर रात तीन बजे शुरू हुआ। गहरी नींद में सोए शहरवासियों के घरों में मोबाइल और टेलीफोन की घंटियां गूंजने लगीं। हर किसी के दिमाग में यही था कि फोन करने वाला कोई इमरजेंसी में है लेकिन रिसीव करने पर सिर्फ एक ही सूचना थी कि भूकंप आने वाला है।
घर से बाहर निकलो। बस फिर क्या था यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। देखते ही देखते पुराने शहर में हजारों लोग मुबारक मंडी, परेड ग्राउंड और अन्य खुले मैदानों पर पहुंच गए।
यही हाल तालाब तिल्लो, जानीपुर, ज्यूल, विक्रम चौक, रेशम घर कालोनी, सतवारी, गांधीनगर, शास्त्री नगर, नानक नगर, सैनिक कालोनी, बठिंडी आदि क्षेत्रों में था। रेशम घर पार्क में तो सैकड़ों लोग मौजूद थे। संभाग के अन्य जिलों में भी भूकंप की अफवाह से ऐसे ही हालात थे।
क्या बच्चे क्या बूढ़े हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर दौड़ रहा था। भूकंप की अफवाहों को सबसे ज्यादा जोर मोबाइल और सोशल साइट ने दिया। हालांकि भूकंप के बारे में पूछने पर किसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी। कोई कहने लगा कि अखनूर वाली तरफ भूकंप आ गया है तो कोई कह रहा था कि 4-5 बजे के बीच भूकंप आ जाएगा।
अफवाह से शहरवासियों की संडे की छुट्टी की सारी प्लानिंग पर पानी फिर गया। देर रात तीन बजे से शुरू हुआ यह सिलसिला सुबह सात बजे तक जारी रहा। सूर्य की रोशनी निकलने पर ही लोगों ने राहत की सांस ली। यह नजारा शहर के हर कोने में था। रियासत में अक्तूबर 2005 में आए सबसे भीषण भूकंप के बाद रविवार को लोगों में इसकी जबरदस्त दहशत देखी गई।