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मंदिर में तोड़फोड़ मामले पर J&K विधानसभा में हंगामा

Thu, 23 Jun 2016 11:29 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Thu, 23 Jun 2016 11:29 PM IST
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Ruckus in J & K Assembly
व‌िधानसभा में हंगामा - फोटो : Amar Ujala
जम्मू के मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोपी मनोरोगी पर सरकार द्वारा वीरवार को अपने ही द्वारा लगाया गया पीएसए हटाने का फैसला लिया गया। यह फैसला तब लिया गया जब पीडीपी विधायकों ने इसका विरोध किया। वहीं सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का भाजपा विधायकों ने जमकर विरोध किया। इस दौरान हंगामे की स्थिति रही। 
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गौरतलब है कि जानीपुर इलाके में स्थित आपशंभु मंदिर में तोड़फोड़ के बाद जम्मू संभाग में तनाव पैदा हो गया था। पुलिस ने मौका संभालते हुए कहा कि कथित आरोपी मनोरोगी है। गत बुधवार को राज्य प्रशासन ने मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोपी यासीर जो शिवा, डोडा का रहने वाला है, उसे पीएसए के तहत बंद किया था।
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वीरवार सुबह जब विधानसभा में सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो पीडीपी के विधायकों ने मुद्दे को उठाया। कोकरनाग से विधायक अब्दुल रहीम राथर और शोपियां से विधायक मोहम्मद यूसुफ बट ने सदन में कहा कि एक मनोरोगी को पीएसए के तहत कैसे बंद किया जा सकता है, उसे जल्द रिहा किया जाए। इस बीच निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने भी हंगामा किया।
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नहीं हटाया जा सकता है पीएसए

Ruckus in J & K Assembly
जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा में हंगामा - फोटो : Amar Ujala
सदन में मौजूद राजस्व मंत्री बशारत बुखारी ने उत्तेजित सदस्यों को शांत करते हुए कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी कि कैसे एक मनोरोगी पर पीएसए लगाया गया है। यह भी कहा कि पीएसए को हटाया जाएगा। 
मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन पर भाजपा विधायक उत्तेजित हो गए और उन्होंने इस फैसले का विरोध किया। आरएस पठानिया, सतपाल शर्मा और राजीव जसरोटिया खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है, ऐसा नहीं चलेगा। इंजीनियर रशीद ने भाजपा विधायकों का विरोध किया। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। लेकिन, स्पीकर ने प्रश्नकाल शुरू करा दिया और मामला ठंडा हो गया।

शून्यकाल में भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने मामले को दुबारा उठाया और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मनोरोगी पर पीएसए को नहीं हटाया जा सकता। पठानिया जो लॉ ग्रेजुएट हैं, उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री के पास भी पीएसए हटाने का अधिकार नहीं है। केवल सब-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि उस आरोपी को पुलिस ने मनोरोगी कहा है, किसी प्राधिकृत मेडिकल बोर्ड ने नहीं। 
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