पाकिस्तान से सीमा लगने के कारण रोहिंग्या गंभीर खतरा
रियासत में रह रहे रोहिंग्याओं तथा बांग्लादेशियों से आतंरिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जम्मू तथा कारगिल में पाकिस्तान से सीमा लगने के कारण यह गंभीर खतरा है। पाकिस्तान के लिए खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराने में इनका इस्तेमाल हो सकता है।
साथ ही आतंकियों के लिए मददगार की भी भूमिका निभा सकते हैं। पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी जम्मू और लद्दाख में ही क्यों बसे, इसका पता लगाया जाना चाहिए। बार्डर तथा आतंकग्रस्त राज्य होने के नाते इनके खासकर इन दो इलाकों में बसने के कारणों की सरकार तथा सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी होनी चाहिए।
यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि ये किसी माड्यूल का हिस्सा तो नहीं। सुरक्षा एजेंसियों के पास जम्मू, सांबा व लेह-कारगिल में ही इनके बसने की जानकारी है, लेकिन ये किश्तवाड़ में भी पकड़े जा चुके हैं। इसलिए यह जरूरी है कि पूरी रियासत में सर्वे कर इनके ठौर ठिकाने का पता लगाया चाहिए। विभिन्न राजनीतिक दलों तथा विहिप की ओर से इनके आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने तथा सुरक्षा के खतरे को लेकर मुद्दा उठाया जा चुका है।
मौजूद दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए
पूर्व डीजीपी एमएम खजूरिया का कहना है कि यह काफी संवेदनशील राज्य है। यहां हर आने जाने वालों पर पैनी निगाह होनी चाहिए। ये यहां कैसे बस गए इसकी तो सरकार को जानकारी होनी ही चाहिए। पूर्व आईजी एसएस बिजराल के अनुसार यह गंभीर मसला है। इसमें किसी भी प्रकार की हीलाहवाली नहीं की जानी चाहिए।
सरकार को इस बारे में फुलप्रूफ एक्शन प्लान बनाए जाने की जरूरत है। इसमें उनके यहां इतनी दूर आने के कारणों तथा किस आधार पर यहां रह रहे हैं इसकी पड़ताल भी होनी चाहिए। उनके पास मौजूद दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए। यदि उनके आधार कार्ड और राशन कार्ड बन गए हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।