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रघुनाथ मंदिर पर फिदायीन हमले के 6 आरोपियों की रिहाई का फैसला सही: हाईकोर्ट

Thu, 16 Mar 2017 09:18 PM IST
जेएनएफ/जम्मू
जेएनएफ/जम्मू Updated Thu, 16 Mar 2017 09:18 PM IST
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Right decision on release of 6 accused in fidayeen attack on Raghunath Temple: High Court
court shimla
शहर के रघुनाथ मंदिर में हुए फिदायीन हमले की रिवीजन याचिका पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए छह आरोपियाें की रिहाई को सही माना है।
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हाईकोर्ट में जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर ने कहा, मामले में आरोपी बनाए गए छह लोगों के खिलाफ न तो कोई सबूत है और न ही गवाही में इनका जिक्र। ट्रायल कोर्ट ने भी इन्हीं पहलुओं को जांचने के बाद अपना फैसला दिया था, जो सही है।
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हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति ट्रायल कोर्ट को भेजने का आदेश देते हुए कहा, आरोपी के तौर पर वीरेंद्र शर्मा और जांच अधिकारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट 30 अक्तूबर 2016 के आदेश के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाए।
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2002 में दो आतंकियों ने किया था हमला

Right decision on release of 6 accused in fidayeen attack on Raghunath Temple: High Court
आतंकवादी - फोटो : Demo Pic.
केस के मुताबिक 30 मार्च 2002 को रघुनाथ मंदिर पर दो आतंकियों ने फिदायीन हमला किया था। दोनों हमलावर मारे गए। बाहु फोर्ट पुलिस स्टेशन ने एनिमी एजेंट्स ऑर्डिनेंस एक्ट, 2/3 आफ प्रीवेंशन एंड सप्रेशन आफ सबोटाज एक्ट, धारा 302, 307 और 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज किया।

मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया लेकिन आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर ने सरकार की ओर से सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल एसएस नंदा और आरोपियाें की तरफ से पेश हुए एडवोकेट रूपक रत्ता, एडवोकेट केके पठान की दलीलें सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

अदालत ने कहा कि इस मामले में अभियोजन ने कुल 67 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान दर्ज किए। बयानों में सिर्फ मारे गए दो आतंकियों की बात सामने आई। इनमें से एक गवाह ने भी उक्त छह आरोपियों का नाम नहीं लिया। एक अन्य दलील को भी देखें तो मांडा टोल पोस्ट से गुजरे जिस ट्रक (नंबर जेकेएस-4167 ) का जिक्र आया है, उसमें किसी हथियारबंद की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है।

अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने विरेंद्र शर्मा नामक व्यक्ति की संलिप्तता का प्रथम दृष्टया आधार पाया है, जबकि जांच अधिकारी ने उसे आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया। ऐसे में जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा गया है। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले से भी अदालत सहमत है।
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