सरकार के रोड मैप के बिना मुश्किल होगी घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी
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विधानसभा और विधान परिषद में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी को लेकर पारित प्रस्ताव को लेकर कश्मीरी पंडितों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि पहली बार सभी ने मिल कर कश्मीरी पंडितों की वापसी को लेकर सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई रोड मैप तैयार नहीं हो पाया है और इसके बिना वापसी संभव नहीं है।
कश्मीरी पंडित सभा के अध्यक्ष केके खोसा ने कहा कि दोनों सदनों में सर्वसम्मति स्रे स्ताव का पारित होना दर्शाता है कि कश्मीर में अब कश्मीरी पंडितों को लेकर नई सोच पैदा हुई है। सभी राजनीतिक पार्टियों ने सकारात्मक कदम उठाया है, लेकिन इसको अमलीजामा पहनाना बड़ी चुनौती है। इस पर विशेष तौर पर काम किया जाना चाहिए।
वायस आफ कश्मीरी पंडित के अध्यक्ष रोशन लाल रैना ने कहा कि जुबानी तौर पर प्रस्ताव तो पारित कर दिया है, लेकिन इसको लेकर रोड मैप क्या होगा, इसका कुछ भी पता नहीं है और रोड मैप के बिना कश्मीरी पंडितों की वापसी किसी तरह से भी संभव नहीं है। सबको कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी को लेकर रोड मैप तैयार करने की जरूरत है।
'कश्मीरी पंडितों का 27 वर्ष का संघर्ष रंग लाया है'
पनून कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी चुरंगू ने कहा कि प्रस्ताव पारित होने से एक बात साबित होती है कि कश्मीरी पंडितों का 27 वर्ष का संघर्ष रंग लाया है। सभी कश्मीरी पंडितों की कश्मीर में वापसी चाहते हैं, लेकिन 27 वर्ष पहले घाटी को छोड़ना क्यों पड़ा, इसको लेकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है।
पनून कश्मीर की मांग है कि कश्मीरी पंडितों के घाटी छोड़ने के कारणों को पता लगाया जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित केवल होम लैंड के जरिये ही वापसी चाहते हैं।