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Jammu News: श्रद्धालुओं को बांटा अध्यात्म, भक्ति, धर्म और साधना का ज्ञान
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ठंगर बेरी पत्तन में तीन दिवसीय श्री हरि कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाैशेरा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ठंगर बेरी पत्तन में आयोजित तीन दिवसीय श्री हरि कथा का रविवार को समापन हुआ। साध्वी ज्योत्सना भारती ने श्रद्धालुओं को अध्यात्म, भक्ति, धर्म और साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि धर्म के मर्म को न जानने वाले कुछ स्वार्थी लोगों ने ही इन गरिमामय शब्दों की इतनी संकीर्ण व छिछली व्याख्या की है। धर्म कतई यह नहीं कहता कि आपने अगर साधना का संकल्प लिया है तो आप समाज में फैली कुरीतियों के प्रति आंखें मूंदकर बैठ जाएं। निष्क्रिय होकर जो हो रहा है उसके मात्र मूकदर्शक बन जाएं। समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को त्यागकर, आसपास व्याप्त विकृतियों को दूर करने का प्रयास ही न करें। यदि ऐसा होता तो समर्थ गुरु रामदास कभी भी छत्रपति शिवाजी को मुगलों के विरुद्ध योद्धा के रूप में खड़ा न करते। अर्जुन जो युद्ध से पलायन कर रहा था जगद्गुरु श्री कृष्ण उसे धनुर्धारी अर्जुन बनाकर अधर्मियों का विनाश नहीं करते। धर्म के चिह्नों को धारण करने से मनुष्य धार्मिक नहीं बना जाता अपितु गुरु-कृपा से ईश्वर के तत्व रूप का दर्शन कर व सवृत्तियों को धारण करने से धार्मिक बना जाता है। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ किया गया। इस माैके पर स्वामी सुचेतानंद, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना, स्वामी हरिदासानंद, महात्मा गुरप्रीत, कप्तान स्वर्ण सिंह वीर चक्र, रविंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाैशेरा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से ठंगर बेरी पत्तन में आयोजित तीन दिवसीय श्री हरि कथा का रविवार को समापन हुआ। साध्वी ज्योत्सना भारती ने श्रद्धालुओं को अध्यात्म, भक्ति, धर्म और साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि धर्म के मर्म को न जानने वाले कुछ स्वार्थी लोगों ने ही इन गरिमामय शब्दों की इतनी संकीर्ण व छिछली व्याख्या की है। धर्म कतई यह नहीं कहता कि आपने अगर साधना का संकल्प लिया है तो आप समाज में फैली कुरीतियों के प्रति आंखें मूंदकर बैठ जाएं। निष्क्रिय होकर जो हो रहा है उसके मात्र मूकदर्शक बन जाएं। समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को त्यागकर, आसपास व्याप्त विकृतियों को दूर करने का प्रयास ही न करें। यदि ऐसा होता तो समर्थ गुरु रामदास कभी भी छत्रपति शिवाजी को मुगलों के विरुद्ध योद्धा के रूप में खड़ा न करते। अर्जुन जो युद्ध से पलायन कर रहा था जगद्गुरु श्री कृष्ण उसे धनुर्धारी अर्जुन बनाकर अधर्मियों का विनाश नहीं करते। धर्म के चिह्नों को धारण करने से मनुष्य धार्मिक नहीं बना जाता अपितु गुरु-कृपा से ईश्वर के तत्व रूप का दर्शन कर व सवृत्तियों को धारण करने से धार्मिक बना जाता है। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ किया गया। इस माैके पर स्वामी सुचेतानंद, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना, स्वामी हरिदासानंद, महात्मा गुरप्रीत, कप्तान स्वर्ण सिंह वीर चक्र, रविंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुु उपस्थित रहे।