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Jammu News: सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद, फिर भी पहुंचे श्रद्धालु
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साइंस कॉलेज से जे के सेट की परीक्षा देकर बाहर आते परीक्षार्थी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। चंद्रग्रहण से पहले सूतक लगते ही शहर के सभी मंदिरों के कपाट दोपहर 12 बजे बंद कर दिए गए। सुबह आरती और भोग लगाकर मंदिरों में किसी के भी अंदर जाना वर्जित कर दिया गया।
कुछ स्थानों पर मंदिर बंद होने के बाद भी श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। बावे वाली माता मंदिर के दोपहर 12 बजे कपाट बंद कर दिए गए। इसके बावजूद दिन भर श्रद्धालु पहुंचते रहे। मुख्य मंदिर के बाहर तक जाने दिया गया। श्रद्धालुओं ने बाहर से ही माथा टेका। महंत बिट्टा ने बताया कि रविवार को काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आते हैं। उनकी श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर तक उन्हें आकार माथा टेकने की व्यवस्था की गई थी। मंदिर पहुंचे रवि जेटली का कहना है कि पिछले कुछ सालों से लगातार रविवार को मंदिर आते हैं। ग्रहण के कारण मंदिर बंद कर दिया गया। बाहर से ही माथा टेककर जा रहा हूं। सुमन ने कहा कि परिसर तक आने की अनुमति है। हमारा भी फर्ज है कि मंदिर कि ओर से की गई व्यवस्था का ध्यान रखें। रणवीरेश्वर मंदर के पंडित विनोद ने कहा कि सुबह आरती और भोग लगाकर मंदिर को दोपहर बाद बंद कर दिया गया। सुबह काफी श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर सोमवार सुबह पांच बजे नियमानुसार खोला जाएगा। सुभाष और कर्ण ने बताया कि ग्रहण लगने से पहले ही माथा टेक लिया। गांधीनगर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के पंडित मनोज ने बताया कि मंदिर को द्वार दोपहर को बंद कर दिए गए। तड़के विशेष पूजा के साथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। रोजाना मंदिर आने वाले सुमित ने कहा कि कल ही मंदिर में बता दिया गया था कि रविवार को ग्रहण की वजह से मंदिर बंद कर दिया जाएगा। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने इससे पहले ही पूजा-पाठ कर लिया।
रघुनाथ मंदिर के मैनेजर गोपाल ने बताया कि मुख्य द्वार दोपहर को बंद कर दिए गए। सुबह छह बजे साफ-सफाई व पूजा के बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। एमपी से सपरिवार घूमने आए पवन ने बताया कि आज तो दर्शन नहीं हो पाए। अभी एक-दो दिन जम्मू में ही रुके हैं। सोमवार दर्शन कर लेंगे। सिद्दड़ा में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुख्य द्वार से ही मंदिर परिसर में जाने वालों को लौटा दिया गया।
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जम्मू। चंद्रग्रहण से पहले सूतक लगते ही शहर के सभी मंदिरों के कपाट दोपहर 12 बजे बंद कर दिए गए। सुबह आरती और भोग लगाकर मंदिरों में किसी के भी अंदर जाना वर्जित कर दिया गया।
कुछ स्थानों पर मंदिर बंद होने के बाद भी श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे। बावे वाली माता मंदिर के दोपहर 12 बजे कपाट बंद कर दिए गए। इसके बावजूद दिन भर श्रद्धालु पहुंचते रहे। मुख्य मंदिर के बाहर तक जाने दिया गया। श्रद्धालुओं ने बाहर से ही माथा टेका। महंत बिट्टा ने बताया कि रविवार को काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आते हैं। उनकी श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर तक उन्हें आकार माथा टेकने की व्यवस्था की गई थी। मंदिर पहुंचे रवि जेटली का कहना है कि पिछले कुछ सालों से लगातार रविवार को मंदिर आते हैं। ग्रहण के कारण मंदिर बंद कर दिया गया। बाहर से ही माथा टेककर जा रहा हूं। सुमन ने कहा कि परिसर तक आने की अनुमति है। हमारा भी फर्ज है कि मंदिर कि ओर से की गई व्यवस्था का ध्यान रखें। रणवीरेश्वर मंदर के पंडित विनोद ने कहा कि सुबह आरती और भोग लगाकर मंदिर को दोपहर बाद बंद कर दिया गया। सुबह काफी श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर सोमवार सुबह पांच बजे नियमानुसार खोला जाएगा। सुभाष और कर्ण ने बताया कि ग्रहण लगने से पहले ही माथा टेक लिया। गांधीनगर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के पंडित मनोज ने बताया कि मंदिर को द्वार दोपहर को बंद कर दिए गए। तड़के विशेष पूजा के साथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। रोजाना मंदिर आने वाले सुमित ने कहा कि कल ही मंदिर में बता दिया गया था कि रविवार को ग्रहण की वजह से मंदिर बंद कर दिया जाएगा। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने इससे पहले ही पूजा-पाठ कर लिया।
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रघुनाथ मंदिर के मैनेजर गोपाल ने बताया कि मुख्य द्वार दोपहर को बंद कर दिए गए। सुबह छह बजे साफ-सफाई व पूजा के बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। एमपी से सपरिवार घूमने आए पवन ने बताया कि आज तो दर्शन नहीं हो पाए। अभी एक-दो दिन जम्मू में ही रुके हैं। सोमवार दर्शन कर लेंगे। सिद्दड़ा में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुख्य द्वार से ही मंदिर परिसर में जाने वालों को लौटा दिया गया।

साइंस कॉलेज से जे के सेट की परीक्षा देकर बाहर आते परीक्षार्थी। संवाद
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