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एलजी की बैठक में फैसला: कोरोना के कारण आर्थिक तंगी का शिकार ट्रांसपोर्टरों को राहत, यात्री कर में पचास फीसदी छूट
Thu, 03 Feb 2022 12:48 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Thu, 03 Feb 2022 12:48 PM IST
सार
एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक मिली रियायत। इस अवधि में की गई अदायगी 31 मार्च 2022 तक होगी समायोजित। सरकार ने कहा ट्रांसपोर्टरों को इससे मिलेगा बड़ी राहत।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बैठक के दौरान
- फोटो : संवाद
विस्तार
कोरोना के दौरान आर्थिक तंगी का शिकार हुए ट्रांसपोर्टरों को सरकार ने यात्री कर में पचास फीसदी तक की छूट दी है। सरकार ने यह छूट एक अप्रैल, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक दी है, लेकिन जिन ट्रांसपोर्टरों ने इस अवधि के यात्री कर का भुगतान कर दिया है, उनकी अतिरिक्त राशि को एक अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
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उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में प्रशासनिक परिषद (एसी) की बैठक में बुधवार को इस छूट को मंजूरी दी गई। परिषद ने माना कि कोरोना की पहली लहर के दौरान लॉकडाउन से यात्री वाहन मालिकों को काफी नुकसान हुआ था।
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ट्रांसपोर्टर बोले, राहत ऊंट के मुंह में जीरा समान
सरकार के इस फैसले पर ट्रांसपोर्टरों ने निराशा व्यक्त की है। ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सिंह चिब ने कहा कि सरकार की छूट ऊंट के मुंह में जीरा समान है। सरकार से यात्री कर के साथ टोकन टैक्स और बैंक ब्याज को माफ करने की मांग की गई थी।
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उन्होंने कहा कि एक मेटोडार का वार्षिक यात्री कर 2000 रुपये होता है, सरकार ने कर में पचास फीसदी छूट दी है यानी अब एक हजार रुपये कर ही देना होगा। अच्छा होता अगर सरकार टोकन टैक्स माफ करती, उससे ट्रांसपोर्टरों को लाभ मिलता। सरकार ने उस अवधि का यात्री कर माफ किया है जब यात्री वाहनों को 50 फीसदी यात्रियों के साथ परिचालन की अनुमति थी। ऐसे में सरकार के इस फैसले से ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत नहीं मिली है।
प्रशासनिक परिषद: श्रीनगर और बडगाम में आवासीय कॉलोनी के लिए भूमि हस्तांतरित
प्रशासनिक परिषद ने श्रीनगर और बडगाम में आवासीय कालोनियों के लिए आवास व शहरी विकास विभाग को निशुल्क भूमि हस्तांतरित करने का फैसला लिया है। दोनों जिलों के सात गांवों में 17 स्थानों पर 2318 कनाल और आठ मरला भूमि को निशुल्क हस्तांतरित किया गया है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि हाउसिंग कॉलोनी परियोजना का निर्माण जम्मू-कश्मीर में आर्थिक, औद्योगिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कुशल और अकुशल श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय विक्रेताओं और युवाओं को अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगा।
श्रीनगर विकास प्राधिकरण (एसडीए) और जम्मू-कश्मीर हाउसिंग बोर्ड (जेकेएचबी) को इन परियोजनाओं का डिजाइन और अन्य तौर तरीकों को अंतिम रूप देने का काम सौंपा गया है। आवास किफायती हों, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। हाल ही में रियल एस्टेट सम्मेलन 2022 में राजधानी श्रीनगर और जम्मू में आवास स्टाक विकसित करने को फैसले लिए गए थे।