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Jammu News: बिल्व पत्र चढ़ाने से भोले होते हैं प्रसन्न, हर मनोकामना करते हैं पूरी
Fri, 26 Jul 2024 04:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 26 Jul 2024 04:12 AM IST
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श्री सनातन धर्म सभा में महा शिव पुराण कथा में संगत ने जानी शिव की महिमा
कथा वाचक ने लोगों को प्रवचनों से किया निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। भगवान शंकर की पूजा के दौराान शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाना बहुत अहम माना जाता है। इससे भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। यह ज्ञान कथावाचक सूरज कौशल शास्त्री ने वीरवार को संगत को दिया।
श्री सनातन धर्म सभा में श्री महा शिव पुराण कथा में पांचवें दिन भी जारी रही। इसमें कथा वाचक ने बताया कि हर सोमवार को बिल्व पत्र शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। सावन माह में रोजाना बिल्व पत्र चढ़ाना फलदायक माना गया है। शिवलिंग के पास दीपक जलाने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है।
भगवान शिव ने प्रारंभ में रविवार को पहला दिन बनाया। हर दिन की पूजा करना व फल भी तय किए। शास्त्री ने बताया कि पाप से छुटकारे के लिए रविवार को पूजा, लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सोमवार का दिन, रोगों की शांति के लिए मंगलवार का दिन व बुधवार का दिन विष्णु पूजा के लिए तय किया। साथ ही आयु की वृद्धि के लिए वीरवार, भोगों के इच्छुक के लिए शुक्रवार का दिन व्रत रखने व स्त्री सुख को प्राप्त करने के लिए शनिवार का दिन पूजा के लिए निर्धारित किया।
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कथा के दौरान इच्छा अनुसार दान देने को कहा गया। वहीं, दूसरों के दोषों की तरफ ध्यान नहीं देने व क्रोध उत्पन्न करने वाली हर बात से दूर रहने की अपील की गई। कथा के समापन पर आरती के बाद संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
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कथा वाचक ने लोगों को प्रवचनों से किया निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। भगवान शंकर की पूजा के दौराान शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाना बहुत अहम माना जाता है। इससे भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। यह ज्ञान कथावाचक सूरज कौशल शास्त्री ने वीरवार को संगत को दिया।
श्री सनातन धर्म सभा में श्री महा शिव पुराण कथा में पांचवें दिन भी जारी रही। इसमें कथा वाचक ने बताया कि हर सोमवार को बिल्व पत्र शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। सावन माह में रोजाना बिल्व पत्र चढ़ाना फलदायक माना गया है। शिवलिंग के पास दीपक जलाने से सभी पापों से छुटकारा मिलता है।
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भगवान शिव ने प्रारंभ में रविवार को पहला दिन बनाया। हर दिन की पूजा करना व फल भी तय किए। शास्त्री ने बताया कि पाप से छुटकारे के लिए रविवार को पूजा, लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सोमवार का दिन, रोगों की शांति के लिए मंगलवार का दिन व बुधवार का दिन विष्णु पूजा के लिए तय किया। साथ ही आयु की वृद्धि के लिए वीरवार, भोगों के इच्छुक के लिए शुक्रवार का दिन व्रत रखने व स्त्री सुख को प्राप्त करने के लिए शनिवार का दिन पूजा के लिए निर्धारित किया।
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कथा के दौरान इच्छा अनुसार दान देने को कहा गया। वहीं, दूसरों के दोषों की तरफ ध्यान नहीं देने व क्रोध उत्पन्न करने वाली हर बात से दूर रहने की अपील की गई। कथा के समापन पर आरती के बाद संगत में प्रसाद वितरित किया गया।