{"_id":"5f4735559001db73a436f7c2","slug":"pulwama-attack-update-in-hindi-nia-files-chargesheet-names-only-female-insha-jaan-connection-with-terrorists","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pulwama Attack: पुलवामा हमले में शामिल अकेली महिला गिरफ्तार, पिता के साथ मिलकर करती थी आतंकियों की मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pulwama Attack: पुलवामा हमले में शामिल अकेली महिला गिरफ्तार, पिता के साथ मिलकर करती थी आतंकियों की मदद
Thu, 27 Aug 2020 02:56 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 27 Aug 2020 02:56 PM IST
विज्ञापन
2019 पुलवामा हमला: इंशा जान
- फोटो : ट्विटर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलवामा हमले को लेकर जैसे-जैसे एनआईए की जांच आगे बढ़ रही है, परत दर परत कई खुलासे सामने आ रहे हैं। दिल दहला देने वाला यह हमला पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की एक सोची समझी साजिश थी, जिसका ताना-बाना हमले से दो साल पहले से ही बुना जा चुका था।
विज्ञापन
इसके लिए बाकायदा आतंकियों को ट्रेनिंग लेने के लिए अफगानिस्तान भेजा गया था। तालिबानी आतंकी कैंप में उन्हें विस्फोट की ट्रेनिंग दी गई थी। एनआईए की जांच में अब इस मामले में शामिल इकलौती महिला आतंकी की भूमिका सामने आई है।
विज्ञापन
पता चला है कि जांच के दौरान गिरफ्तार की गई अकेली महिला इंशा जान इस हमले के मास्टरमाइंड फारूक की करीबी थी। उसने हर संभव तरीके से अपने साथी आतंकियों की सहायता की थी।
विज्ञापन
एनआईए द्वारा फाइल की गई चार्जशीट में दावा किया गया है कि 23 वर्षीय इंशा जान मार्च में सुरक्षाबलों द्वारा कश्मीर में मारे गए पाकिस्तानी बम बनाने वाले मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक की साथी थी। वह उसके साथ फोन और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थी।
एनआईए के अनुसार इंशा जान के पिता तारिक पीर को भी फारूक और उसके संबंधों के बारे में पता था। पुलवामा और आसपास के इलाकों में कई तरह की गतिविधियों में तारीक पीर ने उमर फारूक और उसके दो अन्य सहयोगियों की मदद की थी।
साल 2018 और 2019 के बीच कई बार तो आतंकवादी उनके घर में ठहरे भी थे। इंशा और पीर ने उमर फारूक, समीर डार और आदिल अहमद डार को भोजन, आश्रय और अन्य रसद प्रदान की थी।