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Jammu News: बिजली संशोधन बिल के खिलाफ कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज
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- निजीकरण का लगाया आरोप, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, काम प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के विरोध में बुधवार को जम्मू-कश्मीर के बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले यह देशव्यापी विरोध किया गया।
यूनियन के चेयरमैन इंजीनियर सचिन टिक्कू की अध्यक्षता में सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को असुविधा न हो इसके लिए बिजली आपूर्ति सुचारु रखी गई। कार्यालयों व राजस्व केंद्रों में नियमित कामकाज प्रभावित है। प्रदर्शनकारियों ने पावर सेक्टर के निजीकरण, मल्टीपल लाइसेंसिंग के जरिए वितरण व्यवस्था में बदलाव, टीबीसीबी मॉडल से उत्पादन-प्रसारण और पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई। टिक्कू ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन दिया है। कमेटी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की कि बिल और प्रस्तावित नीति के खिलाफ अपनी असहमति दर्ज कर सार्वजनिक हितों की रक्षा करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के विरोध में बुधवार को जम्मू-कश्मीर के बिजली कर्मचारियों व इंजीनियरों ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले यह देशव्यापी विरोध किया गया।
यूनियन के चेयरमैन इंजीनियर सचिन टिक्कू की अध्यक्षता में सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को असुविधा न हो इसके लिए बिजली आपूर्ति सुचारु रखी गई। कार्यालयों व राजस्व केंद्रों में नियमित कामकाज प्रभावित है। प्रदर्शनकारियों ने पावर सेक्टर के निजीकरण, मल्टीपल लाइसेंसिंग के जरिए वितरण व्यवस्था में बदलाव, टीबीसीबी मॉडल से उत्पादन-प्रसारण और पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई। टिक्कू ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन दिया है। कमेटी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की कि बिल और प्रस्तावित नीति के खिलाफ अपनी असहमति दर्ज कर सार्वजनिक हितों की रक्षा करें।
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