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सुनेल पंचायत में डीडीसी, पंचायत चुनाव का बहिष्कार
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जम्मू। वार्ड की सीट को आरक्षित करने के विरोध में शनिवार को सुनेल पंचायत तरगवाल अखनूर के वार्ड 6 के मतदाताओं ने जिला विकास परिषद (डीडीसी) और पंचायत उपचुनाव का बहिष्कार किया। क्षेत्रवासियों ने मतदान केंद्र के बाहर बहिष्कार के बैनर लगाकर विरोध जताया। सीट आरक्षित करने के खिलाफ प्रदर्शन किया। अधिकारियों के समझाने के बावजूद वार्ड 6 से कुल 286 वोट में से एक भी वोट नहीं डाला गया। इस सीट पर दो प्रत्याशी खड़े थे।
सीट आरक्षित करने के विरोध में सुबह से वार्ड 6 के मतदाता संबंधित मतदान केंद्र के बाहर पहुंच गए थे। इसी मतदान केंद्र में वार्ड 7, 8 और 9 के केंद्र भी बनाए गए थे, जिसमें 775 मतदाता थे। इन तीनों वार्डों के लिए मतदान करने को सुबह से ही मतदाताओं का पहुंचना शुरू हो गया था। लेकिन वार्ड 6 से आए सभी मतदाता मतदान केंद्र के बाहर खड़े रहकर विरोध करते रहे। स्थानीय पंच नवीन बख्शी ने बताया कि वर्ष 2018 के पंचायत चुनाव में इस सीट को सामान्य से आरक्षित कर दिया गया था, जबकि वार्ड में आरक्षित मतदाता काफी कम हैं और अधिकतर मतदाता सामान्य वर्ग से हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन चुनाव आयोग ने दोबारा वार्ड 6 को आरक्षित की श्रेणी में डाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड के मतदाताओं की मांग को नजरअंदाज किया गया, जिससे चुनाव का बहिष्कार किया गया है। चुनाव आयोग को क्षेत्रवासियों की मांग पर उचित फैसला लेना चाहिए। इस बीच एक प्रशासनिक अधिकारी ने वार्ड के निवासियों को समझाया कि वे पंचायत उपचुनाव को छोड़कर डीडीसी के लिए मतदान कर दें। लेकिन वार्ड के निवासियों ने आखिरी समय तक कोई वोट नहीं डाला। बहिष्कार की सूचना पाकर इस मतदान केंद्र पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए थे, हालांकि मतदान केंद्र पर अन्य वार्डों के लिए मतदान सुचारु रूप से होता रहा।
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सीट आरक्षित करने के विरोध में सुबह से वार्ड 6 के मतदाता संबंधित मतदान केंद्र के बाहर पहुंच गए थे। इसी मतदान केंद्र में वार्ड 7, 8 और 9 के केंद्र भी बनाए गए थे, जिसमें 775 मतदाता थे। इन तीनों वार्डों के लिए मतदान करने को सुबह से ही मतदाताओं का पहुंचना शुरू हो गया था। लेकिन वार्ड 6 से आए सभी मतदाता मतदान केंद्र के बाहर खड़े रहकर विरोध करते रहे। स्थानीय पंच नवीन बख्शी ने बताया कि वर्ष 2018 के पंचायत चुनाव में इस सीट को सामान्य से आरक्षित कर दिया गया था, जबकि वार्ड में आरक्षित मतदाता काफी कम हैं और अधिकतर मतदाता सामान्य वर्ग से हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन चुनाव आयोग ने दोबारा वार्ड 6 को आरक्षित की श्रेणी में डाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड के मतदाताओं की मांग को नजरअंदाज किया गया, जिससे चुनाव का बहिष्कार किया गया है। चुनाव आयोग को क्षेत्रवासियों की मांग पर उचित फैसला लेना चाहिए। इस बीच एक प्रशासनिक अधिकारी ने वार्ड के निवासियों को समझाया कि वे पंचायत उपचुनाव को छोड़कर डीडीसी के लिए मतदान कर दें। लेकिन वार्ड के निवासियों ने आखिरी समय तक कोई वोट नहीं डाला। बहिष्कार की सूचना पाकर इस मतदान केंद्र पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए थे, हालांकि मतदान केंद्र पर अन्य वार्डों के लिए मतदान सुचारु रूप से होता रहा।
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