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Jammu News: जनसुनवाई बीच में छोड़ चले गए अधिकारी, लोगों ने किया प्रदर्शन
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खनन को लेकर लोगों की समस्याएं सुनने के लिए आयोजित हुआ था कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सरकार की ओर से नदी-नालों से खनन के ब्लॉक आवंटित करने से पहले शनिवार को स्थानीय लोगों के साथ एक जनसुनवाई कार्यक्रम रखा गया। जिले के गांव पंगदौर में आयोजित हुए कार्यक्रम में एडीसी सांबा, जिला खनन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी, स्थानीय सरपंच, आदि पहुंचे हुए थे। कार्यक्रम के बीच में ही अधिकारियों के उठ कर जाने पर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। उनका कहना था कि जब लोगों की परेशानी सुननी ही नहीं थीं तो कार्यक्रम रखा ही क्यों?
पूर्व सरपंच रीना चौधरी ने बताया कि उनके क्षेत्र से खनन किया जाता है और खनन विभाग के मापदंडों को नहीं अपनाया जाता। 20 से 30 फुट तक खनन किया जाता है, जिस से क्षेत्र के लोगों के पंपसेट तक सूख गए हैं। पानी का स्तर नीचे चले जाने से लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि खनन विभाग की मिलीभगत से ठेकेदार सरकारी दाम से अधिक पर पर्ची काटते हैं। जो विरोध करता है, उसे रेत ही नहीं दिया जाता। किसान सुरिंदर पाल ने कहा कि उन्होंने ढाई एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल लगाई थी। खनन माफिया गेहूं को बर्बाद कर रेत निकाल कर ले गए। लोगों ने एक स्वर में कहा कि उनके क्षेत्र से खनन को बंद किया जाए। इस पर एडीसी राकेश दुबे व जिला खनन अधिकारी कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर चले गए। उनका कहना था कि उनकी कोई जरूरी बैठक है। उसके बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन व खनन ठेकेदारों के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि जनसुनवाई कार्यक्रम रखा है तो जिला प्रशासन के अधिकारियों को लोगों की परेशानी को सुननी चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। बाद में डीडीसी सदस्य सुभाष भगत ने लोगों से कहा कि उनकी समस्याओं को मुख्य रखा जाएगा। स्थानीय लोगों की समस्याओं को उपायुक्त के ध्यान में भी लाया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सरकार की ओर से नदी-नालों से खनन के ब्लॉक आवंटित करने से पहले शनिवार को स्थानीय लोगों के साथ एक जनसुनवाई कार्यक्रम रखा गया। जिले के गांव पंगदौर में आयोजित हुए कार्यक्रम में एडीसी सांबा, जिला खनन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी, स्थानीय सरपंच, आदि पहुंचे हुए थे। कार्यक्रम के बीच में ही अधिकारियों के उठ कर जाने पर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। उनका कहना था कि जब लोगों की परेशानी सुननी ही नहीं थीं तो कार्यक्रम रखा ही क्यों?
पूर्व सरपंच रीना चौधरी ने बताया कि उनके क्षेत्र से खनन किया जाता है और खनन विभाग के मापदंडों को नहीं अपनाया जाता। 20 से 30 फुट तक खनन किया जाता है, जिस से क्षेत्र के लोगों के पंपसेट तक सूख गए हैं। पानी का स्तर नीचे चले जाने से लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि खनन विभाग की मिलीभगत से ठेकेदार सरकारी दाम से अधिक पर पर्ची काटते हैं। जो विरोध करता है, उसे रेत ही नहीं दिया जाता। किसान सुरिंदर पाल ने कहा कि उन्होंने ढाई एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल लगाई थी। खनन माफिया गेहूं को बर्बाद कर रेत निकाल कर ले गए। लोगों ने एक स्वर में कहा कि उनके क्षेत्र से खनन को बंद किया जाए। इस पर एडीसी राकेश दुबे व जिला खनन अधिकारी कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर चले गए। उनका कहना था कि उनकी कोई जरूरी बैठक है। उसके बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन व खनन ठेकेदारों के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि जनसुनवाई कार्यक्रम रखा है तो जिला प्रशासन के अधिकारियों को लोगों की परेशानी को सुननी चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। बाद में डीडीसी सदस्य सुभाष भगत ने लोगों से कहा कि उनकी समस्याओं को मुख्य रखा जाएगा। स्थानीय लोगों की समस्याओं को उपायुक्त के ध्यान में भी लाया जाएगा।
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