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जानें कैसे, प्रोफेसर से आतंक का मास्टर बनने चल पड़ा था रफी, मरने से पहले पिता से मांगी माफी

Sun, 06 May 2018 08:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 06 May 2018 08:20 PM IST
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Professor turned to militancy rafi bhat joined hizbul, he apology his father before dying
rafi bhat - फोटो : social media

शुक्रवार से लापता कश्मीर यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहम्मद रफी भट ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का दामन थाम लिया था। आतंकी बनने के बाद सिर्फ एक दिन बाद ही वो सुरक्षा बलों के साथ शोपियां में रविवार सुबह की मुठभेड़ में मारा गया।

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मरने से पहले अपने पिता से फोन पर बात की और कहा कि  मैंने अगर आपको दुखी किया है तो मुझे माफ कर दें.... यही वह आखिरी शब्द थे, जो उसने फोन पर पिता से कहा था। रविवार सुबह जब सुरक्षाबलों की ओर से की गई घेराबंदी में वो फंसा तो उसने द्वारा किए गए गुनाहों पर अपने पिता से माफी मांगी।
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उसके पिता ने बताया जब उसके फोन की घंटी बजी तो एक पल के लिए पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान छा गई क्योंकि वो पिछले दो दिनों से लापता था। लेकिन उन सब के चेहरे की मुस्कान उस समय उड़ गई, जब उसने कहा- अब मेरे अल्लाह के पास जाने का समय आ गया है।  
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शायद रफी भट को अहसास हो चुका था कि आतंकी बनने के दो दिन बाद ही उसकी मौत आ चुकी है। फोन को ट्रेस करते हुए एसएसपी शोपियां शैलेंद्र मिश्रा को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने रफी के परिजनों को गांदरबल से बुलाकर उसे सरेंडर कराने को कहा था।

हालांकि परिवार घर से निकल कर महज 14 किमी दूर पहुंचा ही था कि रफी गोलीबारी में मारा गया। बेटे की मौत की जानकारी पर पूरा परिवार घटना स्थल तक गया भी नहीं, वह वापस घर लौट गए, ताकि बेटे को अंतिम विदाई दे सके।

वहीं, आतंकी प्रोफेसर के पिता फैयाज अहमद भट ने बताया कि उनके  बेटे ने उनसे घटनास्थल पर न आने  की अपील की थी। इसके बाद उसने फिर से माफी मांगते हुए कहा कि अब्बा मुझे माफ करना मैं आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। लेकिन अब मैं खुदा के पास जाने पास जा रहा हूं।

बचपन से था जिहादी मानसिकता का रफी

भले ही रफी आतंक की राह पर चलने के ठीक एक दिन बाद ही मार गिराया गया है। लेकिन वो बचपन से ही जिहादी मानसिकता का था। अपने दो चचेरे भाईयों के नब्बे के दशक में आतंकी बनने के बाद वो भी आतंकी बनने पाकिस्तान जाते हुए भी पकड़ा गया था।

हालांकि उस  समय सुरक्षाबलों ने पकड़ कर उसे परिजनों के हवाले कर दिया था। जिसके बाद उसके पिता ने उसे आतंकी गतिविधियों से दूर रखने का काफी प्रयास किया था।

प्रोफेसर बनने के बाद खुश था परिवार 
रफी के पिता को अक्सर ये चिंता सताती थी कि जिहादी मानसिकता वाले उसके इस बेटे का अंजाम क्या होगा। लेकिन जब उसकी नौकरी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कश्मीर विश्वविद्यालय में लगी तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। पिता फैयाज अहमद भट ने चैन की सांस लेते हुए सोचा की अब आराम से जिंदगी का गुजर-बसर हो ही जाएगा।

पेपर में छापा था नोटिफिकेशन
उसके पीएचडी की डिग्री पूरी करने पर विश्वविद्यालय ने पेपर में एक इश्तिहार देकर इस बात की घोषणा की थी। जिसके मुताबिक उसने रेगुलर बेस पर पढ़ते हुए और सही समय पर अपनी थिसिस को जमा कर दिया है। 

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