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निजी कंपनियों के श्रमिकों की दिहाड़ी बढ़ाने की मांग
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सांबा। बेरोजगारी कम करने के उद्देश्य से सांबा के सिडको में कारखाने लगाए गए। ताकि बेरोजगार युवक युवतियों को काम की तलाश में भटकना न पड़े। अच्छी जीविका कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। उक्त कारखानों में श्रमिकों को दिहाड़ी ही कम मिले तो बेरोजगारी और बढ़ेगी और काम की तलाश में युवक दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।
इसको लेकर भाजपा नेता व पार्षद विनोद सिंह बिन्नी, शिवसेना बाला साहेब ठाकरे के जिला अध्यक्ष नीलम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता विकेश अंबा, सरपंच रविंदर सिंह लबलु ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेश में दिहाड़ीदार 500 के करीब है, लेकिन कारखाना प्रबंधन द्वारा दिहाड़ी बढ़ाई नहीं जाती है। कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी 225 से 300 तक दिहाड़ी दी जा रही है। इसको लेकर लोगों में रोष है। लोगों ने कारखाना प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि श्रमिकों की दिहाड़ी को नहीं बढ़ाया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
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भाजपा नेता व पार्षद विनोद सिंह विन्नी ने बताया कि यह श्रमिकों के साथ भेदभाव है। दिहाड़ी को बढ़ाया जाए। इसके लिए वह प्रशासन सहित आला कमान से भी बात करेंगे।
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शिव बाला साहेब ठाकरे के प्रधान नीलम सिंह ने बताया कि जबसे कारखाने लगे हैं। तब इन कारखानों ने करोड़ों रुपये कमाई की है। इनमें काम करने वाले श्रमिकों का वेतन नहीं बढ़ाया। जो निंदनीय है। अगर अभी भी कारखाना प्रबंधन ने वेतन नहीं बढ़ाया तो प्रदर्शन किया जाएगा।
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सामाजिक कार्यकर्ता विकेश अंबा ने कारखाना प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली पानी से लेकर जमीन तक सांबा के लोगों की ली गई, लेकिन दिहाड़ी 20 साल पहले वाली दी जा रही है, जिसे सांबा के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। कारखाना प्रबंधन दिहाड़ी बढ़ाए, अन्यथा प्रदर्शन के लिए तैयार रहे।
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सरपंच रविंदर सिंह लबलु ने बताया कि जो प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश हैं। वहां दिहाड़ी 380 रुपये के करीब है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में श्रमिकों को दिहाड़ी 225 रुपये दी जा रही है। यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
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इसको लेकर भाजपा नेता व पार्षद विनोद सिंह बिन्नी, शिवसेना बाला साहेब ठाकरे के जिला अध्यक्ष नीलम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता विकेश अंबा, सरपंच रविंदर सिंह लबलु ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि दूसरे प्रदेश में दिहाड़ीदार 500 के करीब है, लेकिन कारखाना प्रबंधन द्वारा दिहाड़ी बढ़ाई नहीं जाती है। कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी 225 से 300 तक दिहाड़ी दी जा रही है। इसको लेकर लोगों में रोष है। लोगों ने कारखाना प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि श्रमिकों की दिहाड़ी को नहीं बढ़ाया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
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भाजपा नेता व पार्षद विनोद सिंह विन्नी ने बताया कि यह श्रमिकों के साथ भेदभाव है। दिहाड़ी को बढ़ाया जाए। इसके लिए वह प्रशासन सहित आला कमान से भी बात करेंगे।
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शिव बाला साहेब ठाकरे के प्रधान नीलम सिंह ने बताया कि जबसे कारखाने लगे हैं। तब इन कारखानों ने करोड़ों रुपये कमाई की है। इनमें काम करने वाले श्रमिकों का वेतन नहीं बढ़ाया। जो निंदनीय है। अगर अभी भी कारखाना प्रबंधन ने वेतन नहीं बढ़ाया तो प्रदर्शन किया जाएगा।
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सामाजिक कार्यकर्ता विकेश अंबा ने कारखाना प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली पानी से लेकर जमीन तक सांबा के लोगों की ली गई, लेकिन दिहाड़ी 20 साल पहले वाली दी जा रही है, जिसे सांबा के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। कारखाना प्रबंधन दिहाड़ी बढ़ाए, अन्यथा प्रदर्शन के लिए तैयार रहे।
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सरपंच रविंदर सिंह लबलु ने बताया कि जो प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश हैं। वहां दिहाड़ी 380 रुपये के करीब है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में श्रमिकों को दिहाड़ी 225 रुपये दी जा रही है। यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है।