फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   problem,jammu news,incroachment

आदेश को ठेंगा, विक्रेता बिना पंजीकरण लगा रहे ठेला

विज्ञापन
problem,jammu news,incroachment
जम्मू। नगर निगम के पास 470 रेहड़ी वाले ही पंजीकृत हैं, जबकि शहर में चार हजार से अधिक रेहड़ियां लग रही हैं। नगर निगम कई बार रेहड़ी वालों को पंजीकरण करवाने के निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन ये लोग आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं।
विज्ञापन

शहर की गलियों, मोहल्लों और बाजारों में शाम को मनमर्जी से रेहड़ियां लगाई जा रही हैं। सुबह और दोपहर को शहर की सड़कों में कम रेहड़ी वाले दिखते हैं, लेकिन शाम होते ही इन पर रेहड़ी वालों का जमावड़ा लग जाता है। इस कारण लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है।
विज्ञापन

पीएम योजना का लाभ उठाने के लिए दो हजार से ज्यादा रेहड़ी धारकों ने आवेदन किया था। इस दौरान कहा गया था कि जल्द वे लोग पंजीकरण करवाएं। मौजूदा समय में निर्धारित रेहड़ी जोन में कम और सड़कों में ज्यादा रेहड़ियां लगाई जा रही हैं। नगर निगम की टीमें कई बार रेहड़ियों को जब्त कर चुकी हैं, लेकिन रेहड़ी धारक फिर से नई रेहड़ी लगा रहे हैं। मौजूदा समय में नगर निगम के दायरे में 4200 से ज्यादा रेहड़ियां लग रही हैं। रेहड़ी धारक नगर निगम द्वारा तय शुल्क को अदा करने से भी पीछे हट रहे हैं। इस कारण भी पंजीकरण नहीं हो पा रहा। मौजूदा समय में लग रही अवैध रेहड़ी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------
रेहड़ी वालों को पंजीकरण करवाने के लिए अवगत करवाया गया था, लेकिन अभी तक 470 ने ही पंजीकरण करवाया है। बिना पंजीकरण के रेहड़ी धारकों पर कार्रवाई की जाएगी। मौजूदा समय में 4200 से ज्यादा रेहड़ियां शहर में लग रही हैं। पंजीकरण करवाने के लिए बार-बार निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
- सुधीर बाली, एसीआर, नगर निगम
---------
शहर में ये हैं रेहड़ी जोन
शहर के गांधी नगर, त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर, परेड, नरवाल में रेहड़ी जोन बनाए गए हैं, यहां पर रेहड़ियां नाममात्र ही लगती हैं। कुछ रेहड़ी जोन में कबाड़ भी फेंका गया है। यहां पर लोगाें की आवाजाही कम होने के कारण रेहड़ी वाले भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही रेहड़ी लगा रहे हैं।

------
पंजीकरण के बाद साल के
देने होते हैं चार हजार रुपये
हर साल पंजीकृत रेहड़ी वाले को चार हजार रुपये नगर निगम को अदा करने होते हैं। अभी तक 470 रेहड़ी धारक ही पंजीकृत हैं। लेकिन 4200 से ज्यादा रेहड़ी धारक बाजारों में सामान बेच रहे हैं, जो फीस अदा न करने के चक्कर में पंजीकरण नहीं करवा रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed