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भविष्य की तैयारी : सेनाएं बहु-क्षेत्रीय अभ्यास के लिए तैयार

Mon, 13 Oct 2025 02:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू Updated Mon, 13 Oct 2025 02:38 AM IST
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Preparedness for the future: Armies gear up for multi-domain exercise
उधमपुर। सुरक्षित ब्रीफिंग हॉल और ऑपरेशनल प्लानिंग केंद्रों में एक बड़े सैन्य अभ्यास की तैयारी शुरू हो गई है। भारत भविष्य के युद्धों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, ऐसे में इस सप्ताह उत्तरी कमान मुख्यालय के तत्वावधान में तीनों सेनाओं का एक बहु-क्षेत्रीय अभ्यास विद्युत विध्वंस शुरू होने वाला है। इसमें न केवल थल, जल और वायु क्षेत्र, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर, विद्युत चुम्बकीय और संज्ञानात्मक क्षेत्र के सैनिक, प्रणालियां, रणनीतियां और सिद्धांत एक साथ आएंगे।
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अभ्यास विद्युत विध्वंस की शुरुआत 4 अक्तूबर को मथुरा में आयोजित एक विचारोत्तेजक पूर्वाभ्यास संवाद से हुई। यहां अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने आधुनिक खतरों और उभरती तकनीकों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। अपने मुख्य भाषण में उत्तरी सेना कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहा कि गतिज और गैर-गतिज अभियानों के बीच की सीमा आज तेजी से धुंधली होती जा रही है। विरोधी संचार को निष्क्रिय करके, उपग्रहों को बाधित करके या दुष्प्रचार के जरिए व्यापक भ्रम पैदा करके, बिना गोली चलाए कमांडर के निर्णय चक्र को पंगु बनाने का प्रयास करेंगे। इस वास्तविकता में बहु-क्षेत्रीय अभियान केवल युद्ध क्षेत्र की रणनीति तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें परिचालन कला में एक व्यापक बदलाव भी शामिल है।
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यह विचार-मंथन सत्र स्लाइड्स या शब्दजाल के बारे में नहीं था, बल्कि पारंपरिक युद्ध के दायरे से परे सोचने के लिए दिमाग तैयार करने के बारे में था। उपग्रहों की कमजोरियों से लेकर सूचना युद्ध तक बातचीत हुई, लेकिन मूल संदेश स्पष्ट था कि भविष्य के युद्ध अब तक अनछुए क्षेत्रों में होंगे और मशीनों के साथ-साथ दिमाग की भी परीक्षा लेंगे।
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पर्दे के पीछे, सैन्य टुकड़ियां अपने गियर और ग्रिड तैयार कर रही हैं, जिसमें विशिष्ट तकनीकों और नई पीढ़ी के उपकरणों को शामिल किया गया है, जो पूरे कमांड क्षेत्र में फैले हुए हैं। संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार को प्राप्त करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण के साथ, निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों के साथ-साथ सीएपीएफ, सहयोगी सेवाओं और केंद्र सरकार की एजेंसियों को भी एकीकृत किया जा रहा है।

आगामी अभ्यास उच्च दबाव वाली स्थितियों का अनुकरण करेगा, जिसमें संचार व्यवधान, साइबर घुसपैठ और दुष्प्रचार शामिल हैं, सैनिकों और कमांडरों को एक परस्पर और नेटवर्क वाले वातावरण में संचालन की चुनौतियों का सामना करने का अभ्यास कराया जाएगा। मूल रूप से, यह अभ्यास न केवल युद्ध के लिए, बल्कि अप्रत्याशितता के लिए भी तैयारी के बारे में है। और इसकी शुरुआत शोरगुल से नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार सेना को आकार देने के लिए सोच-समझकर की गई बातचीत और अच्छी तरह से तैयार की गई रणनीति से हुई।
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