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लखनपुर से कश्मीर तक धरी रह गईं तैयारियां
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अमरनाथ यात्रा को लेकर बैठक करते श्राइन बोर्ड के सदस्य।
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लखनपुर से कश्मीर तक हो गई थीं तैयारियां, जमीनी हकीकत के बाद बोर्ड ने रद्द की यात्रा
-बालटाल ट्रैक को किया गया था क्लीयर, सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी
-देशभर से पहुंचने लगे थे यात्री, कई जगह लगा दिए गए होर्डिंग्स
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमरनाथ यात्रा के लिए प्रवेशदार लखनपुर से लेकर कश्मीर तक तैयारियां की गई थीं। यात्रियों के स्वागत के लिए आधार शिविर भगवती नगर को तैयार किया गया था। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाल लिया था। यात्रा रूट पर कई जगह होर्डिंग्स भी लगाए गए थे। देशभर से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रियों का पहुंचना शुरू हो गया था। कई यात्री और साधु संत कोविड टेस्ट के लिए कतारों में लग रहे थे। लेकिन ऐन मौके पर यात्रा रद्द होने से उन्हें मायूसी मिली है। अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला श्राइन बोर्ड ने कोरोना संकट का जमीनी स्तर पर आकलन करने के बाद किया। बोर्ड ने पाया कि वर्तमान माहौल यात्रा के अनुकूल नहीं है।
अमरनाथ यात्रा के लिए कश्मीर में भी तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ाई गई थी। गांदरबल में सुरक्षाबलों को ठहराने के लिए इंतजाम किए गए थे। पारंपरिक बालटाल ट्रैक को क्लीयर करने के साथ कई लंगर संगठनों को लंगर के लिए अनुमति दी गई थी। अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक में कोविड-19 महामारी की वर्तमान परिस्थितियों और यात्रा पर इसके संभावित प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के 13 जुलाई को दिए आदेश पर चर्चा की। जिसमें जम्मू और कश्मीर में जमीनी स्तर का आकलन करने के बाद यात्रा संचालन का निर्णय सरकार पर छोड़ दिया था।
फरवरी से हो रही थी तैयारियां
बोर्ड ने सूचित किया कि फरवरी 2020 से यात्रा की तैयारियां शुरू की गई थीं। बैठक में जुलाई में जम्मू-कश्मीर में अचानक बढ़े कोरोना संक्रमण के प्रसार पर चिंता जताई गई। फिलहाल पूरे चिकित्सा, सिविल और पुलिस प्रशासन का ध्यान महामारी को नियंत्रण करने पर है। बोर्ड ने जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले पर भी चर्चा की जिसमें कोर्ट ने श्राइन बोर्ड को अंतिम विचार करने का निर्देश दिया। बैठक में सरकार ने जमीनी स्तर पर ऐसे तथ्यों का समर्थन किया जिसमें अमरनाथ यात्रा का संचालन करना उचित नहीं होगा और इस वर्ष बड़े जनहित को ध्यान में रखते हुए यात्रा को रद्द किया गया है। इससे स्वास्थ्य, नागरिक और पुलिस प्रशासन को संसाधनों को संरक्षित करने की बजाय तात्कालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। बैठक में मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, श्राइन बोर्ड के सीईओ बिपुल पाठक, अतिरिक्त सीईओ अनूप कुमार सोनी और श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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-बालटाल ट्रैक को किया गया था क्लीयर, सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी
-देशभर से पहुंचने लगे थे यात्री, कई जगह लगा दिए गए होर्डिंग्स
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमरनाथ यात्रा के लिए प्रवेशदार लखनपुर से लेकर कश्मीर तक तैयारियां की गई थीं। यात्रियों के स्वागत के लिए आधार शिविर भगवती नगर को तैयार किया गया था। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाल लिया था। यात्रा रूट पर कई जगह होर्डिंग्स भी लगाए गए थे। देशभर से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रियों का पहुंचना शुरू हो गया था। कई यात्री और साधु संत कोविड टेस्ट के लिए कतारों में लग रहे थे। लेकिन ऐन मौके पर यात्रा रद्द होने से उन्हें मायूसी मिली है। अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला श्राइन बोर्ड ने कोरोना संकट का जमीनी स्तर पर आकलन करने के बाद किया। बोर्ड ने पाया कि वर्तमान माहौल यात्रा के अनुकूल नहीं है।
अमरनाथ यात्रा के लिए कश्मीर में भी तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ाई गई थी। गांदरबल में सुरक्षाबलों को ठहराने के लिए इंतजाम किए गए थे। पारंपरिक बालटाल ट्रैक को क्लीयर करने के साथ कई लंगर संगठनों को लंगर के लिए अनुमति दी गई थी। अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक में कोविड-19 महामारी की वर्तमान परिस्थितियों और यात्रा पर इसके संभावित प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के 13 जुलाई को दिए आदेश पर चर्चा की। जिसमें जम्मू और कश्मीर में जमीनी स्तर का आकलन करने के बाद यात्रा संचालन का निर्णय सरकार पर छोड़ दिया था।
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फरवरी से हो रही थी तैयारियां
बोर्ड ने सूचित किया कि फरवरी 2020 से यात्रा की तैयारियां शुरू की गई थीं। बैठक में जुलाई में जम्मू-कश्मीर में अचानक बढ़े कोरोना संक्रमण के प्रसार पर चिंता जताई गई। फिलहाल पूरे चिकित्सा, सिविल और पुलिस प्रशासन का ध्यान महामारी को नियंत्रण करने पर है। बोर्ड ने जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले पर भी चर्चा की जिसमें कोर्ट ने श्राइन बोर्ड को अंतिम विचार करने का निर्देश दिया। बैठक में सरकार ने जमीनी स्तर पर ऐसे तथ्यों का समर्थन किया जिसमें अमरनाथ यात्रा का संचालन करना उचित नहीं होगा और इस वर्ष बड़े जनहित को ध्यान में रखते हुए यात्रा को रद्द किया गया है। इससे स्वास्थ्य, नागरिक और पुलिस प्रशासन को संसाधनों को संरक्षित करने की बजाय तात्कालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। बैठक में मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, श्राइन बोर्ड के सीईओ बिपुल पाठक, अतिरिक्त सीईओ अनूप कुमार सोनी और श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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