{"_id":"60ccec548ebc3e343612abb0","slug":"pollution-free-electricity-reached-19-villages-of-siachen","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकास की रोशनी : सियाचिन के 19 गांवों में पहुंची प्रदूषण रहित बिजली, जोर सौर ऊर्जा पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकास की रोशनी : सियाचिन के 19 गांवों में पहुंची प्रदूषण रहित बिजली, जोर सौर ऊर्जा पर
Sat, 19 Jun 2021 12:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 19 Jun 2021 12:26 AM IST
सार
- अभी तक डीजल जनरेटर के सहारे थे ग्लेशियर से सटे दूरदराज के गांव
विज्ञापन
demo pic...
- फोटो : पिक्साबे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने की कवायद के तहत सियाचिन क्षेत्र के 19 गांवों में पहली बार प्रदूषण रहित बिजली पहुंची है। इससे पहले इन सभी गांवों में बल्ब और अन्य विद्युत उपकरणों को डीजल जनरेटर के सहारे चलाया जा रहा था। 11 केवी लाइन से 450 किलोवाट क्षमता के चमशेन माइक्रो हाइडल प्रोजेक्ट से बिजली की आपूर्ति करवाई गई है।
चमशेन परियोजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से वित्त पोषित प्रोजेक्ट है। लद्दाख रिन्यूएबल एनर्जी इनीशिएटिव (एलआरईआई) इस परियोजना को चला रही है। सियाचिन के गांव चमशेन, कुरी, चरासा, बुरमा, पिंचिमिक, हसारा, क्यागर, सुमूर, लकजुंग, तिरिथ, त्याकक्षा, पनामिक, तिरिशा, हरग्याम, फुकपोछे, कोबत, एयी, अरानू और ससोमा में बिजली की जरूरत को डीजी सेट पूरा कर रहे थे। इससे प्रदूषण हो रहा था।
लद्दाख के विद्युत सचिव रविंदर कुमार ने बताया कि सियाचिन के 19 गांवों में पनबिजली ऊर्जा पहुंचने से अब एक 250 और दो 160 केवीए क्षमता के डीजी सेट का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पनबिजली परियोजना की जो बिजली अतिरिक्त बचेगी, उसे अग्रिम इलाकों में तैनात सेना को सप्लाई किया जाएगा।
विज्ञापन
घरों में सौर ऊर्जा उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर
उप राज्यपाल आरके माथुर के सलाहकार उमंग नरूला ने लद्दाख के घरों में सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर दिया है। कार्बन न्यूट्रल लद्दाख को लेकर प्रयासों को लेकर बैठक में नरूला ने कहा कि लोगों के सहयोग से ही प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल बनाया जा सकेगा। केंद्र सरकार इस उद्देश्य को पूरा करवाने को लेकर गंभीर है।
नीति आयोग द्वारा नामित संस्था लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि फसलों और चरागाहों के क्षेत्र वातावरण में मौजूद कार्बन को सोखने में सहायक होते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का विस्तार किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
चमशेन परियोजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से वित्त पोषित प्रोजेक्ट है। लद्दाख रिन्यूएबल एनर्जी इनीशिएटिव (एलआरईआई) इस परियोजना को चला रही है। सियाचिन के गांव चमशेन, कुरी, चरासा, बुरमा, पिंचिमिक, हसारा, क्यागर, सुमूर, लकजुंग, तिरिथ, त्याकक्षा, पनामिक, तिरिशा, हरग्याम, फुकपोछे, कोबत, एयी, अरानू और ससोमा में बिजली की जरूरत को डीजी सेट पूरा कर रहे थे। इससे प्रदूषण हो रहा था।
विज्ञापन
लद्दाख के विद्युत सचिव रविंदर कुमार ने बताया कि सियाचिन के 19 गांवों में पनबिजली ऊर्जा पहुंचने से अब एक 250 और दो 160 केवीए क्षमता के डीजी सेट का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पनबिजली परियोजना की जो बिजली अतिरिक्त बचेगी, उसे अग्रिम इलाकों में तैनात सेना को सप्लाई किया जाएगा।
विज्ञापन
घरों में सौर ऊर्जा उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर
उप राज्यपाल आरके माथुर के सलाहकार उमंग नरूला ने लद्दाख के घरों में सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर दिया है। कार्बन न्यूट्रल लद्दाख को लेकर प्रयासों को लेकर बैठक में नरूला ने कहा कि लोगों के सहयोग से ही प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल बनाया जा सकेगा। केंद्र सरकार इस उद्देश्य को पूरा करवाने को लेकर गंभीर है।
नीति आयोग द्वारा नामित संस्था लद्दाख को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि फसलों और चरागाहों के क्षेत्र वातावरण में मौजूद कार्बन को सोखने में सहायक होते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों का विस्तार किया जाना चाहिए।