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Jammu News: पंजाबी को आधिकारिक दर्जे की मांग तेज, जम्मू में कई जगह रैलियां
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- चौथे दिन सैनिक कॉलोनी, विजयपुर और कठुआ में रैलियां, सिख संगत के समर्थन से आंदोलन ने पकड़ा जोर
- सिख मिशनरी कॉलेज समेत धार्मिक-सामाजिक संगठनों का समर्थन, शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में सैनिक कॉलोनी, विजयपुर, कठुआ समेत जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को सांविधानिक पहचान देने की मांग की।
गुरुद्वारा रानी तालाब, डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिपरिषद और सभी 90 विधायकों से विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव लाने की अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से मांग के समर्थन में लिखित पत्र देने का भी आग्रह किया।
आंदोलन को सिख मिशनरी कॉलेज (रजि.) जम्मू का समर्थन मिला। कॉलेज के जम्मू प्रमुख सरदार कुलवंत सिंह और पवनदीप सिंह ने आंदोलन के प्रति एकजुटता जताते हुए पंजाबी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की जरूरत बताई। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सिंहपुरा (मरालिया), मीरा साहिब और पंचायत छठिया फार्म के सरपंच अवतार सिंह शंटी ने भी समर्थन दिया। सिख संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार आंदोलन में धार्मिक नेताओं, विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, व्यापारियों और विभिन्न गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी अन्य भाषा या समुदाय के विरोध में नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की बहुभाषी सांस्कृतिक विरासत में पंजाबी को उचित पहचान दिलाने की मांग है। मोर्चा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने का ऐलान किया गया है।
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चौथे दिन भी बढ़ता गया समर्थन
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों में पूर्व मंत्री मनजीत सिंह, जेके जाट सभा के अध्यक्ष, पूर्व पार्षद द्वारका चौधरी, डीजीपीसी सचिव सरदार सुरजीत सिंह, पंजाबी विद्वान सरदार बलविंदर सिंह, आरटीआई कार्यकर्ता बलविंदर सिंह, युवा नेता नरिंदर शर्मा समेत कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। आयोजकों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अभियान का समर्थन करने की अपील की।
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- सिख मिशनरी कॉलेज समेत धार्मिक-सामाजिक संगठनों का समर्थन, शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव लाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में सैनिक कॉलोनी, विजयपुर, कठुआ समेत जम्मू संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को सांविधानिक पहचान देने की मांग की।
गुरुद्वारा रानी तालाब, डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिपरिषद और सभी 90 विधायकों से विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव लाने की अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से मांग के समर्थन में लिखित पत्र देने का भी आग्रह किया।
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आंदोलन को सिख मिशनरी कॉलेज (रजि.) जम्मू का समर्थन मिला। कॉलेज के जम्मू प्रमुख सरदार कुलवंत सिंह और पवनदीप सिंह ने आंदोलन के प्रति एकजुटता जताते हुए पंजाबी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की जरूरत बताई। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सिंहपुरा (मरालिया), मीरा साहिब और पंचायत छठिया फार्म के सरपंच अवतार सिंह शंटी ने भी समर्थन दिया। सिख संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार आंदोलन में धार्मिक नेताओं, विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, व्यापारियों और विभिन्न गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी अन्य भाषा या समुदाय के विरोध में नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की बहुभाषी सांस्कृतिक विरासत में पंजाबी को उचित पहचान दिलाने की मांग है। मोर्चा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने का ऐलान किया गया है।
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चौथे दिन भी बढ़ता गया समर्थन
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों में पूर्व मंत्री मनजीत सिंह, जेके जाट सभा के अध्यक्ष, पूर्व पार्षद द्वारका चौधरी, डीजीपीसी सचिव सरदार सुरजीत सिंह, पंजाबी विद्वान सरदार बलविंदर सिंह, आरटीआई कार्यकर्ता बलविंदर सिंह, युवा नेता नरिंदर शर्मा समेत कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। आयोजकों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अभियान का समर्थन करने की अपील की।