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डॉ. मुखर्जी की प्रेरणा व पीएम मोदी के प्रयास से कीर्तिमान रच रहा प्रदेश : एलजी
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- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मनोज सिन्हा ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कहा, डॉ. मुखर्जी की प्रेरणा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से जम्मू-कश्मीर कीर्तिमान रच रहा है। श्रीनगर के टैगोर हाॅल में आयोजित समारोह में सिन्हा ने कहा कि डाॅ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ एकीकृत करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। वह एक राष्ट्र, एक संविधान के समर्थक थे और अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए लड़ते हुए श्रीनगर में उनकी शहादत देश के इतिहास में निर्णायक क्षण रहा। अगस्त, 2019 के बाद प्रदेश की उपलब्धियां डॉ. मुखर्जी के सपने और पीएम मोदी के संकल्प से प्रेरित हैं।
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2027 तक स्कूल-कॉलेज में
आयोजित की जाए प्रदर्शनी
एलजी ने संस्कृति, स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को जुलाई 2025 से जुलाई 2027 तक हर स्कूल, हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन व कार्यों पर प्रदर्शनी, व्याख्यान आयोजित करने का सुझाव दिया। कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में सप्ताह भर चलने वाली प्रदर्शनी और उनके जीवन यात्रा को दर्शाने वाले नाट्य प्रदर्शन आयोजित होने चाहिए।
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कश्मीरी भाषा में नए आपराधिक
कानूनों का अनुवाद किया जारी
उपराज्यपाल ने कश्मीरी भाषा में नए आपराधिक कानूनों का अनुवाद जारी किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) क्षेत्रीय कार्यालय और संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. मुखर्जी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस दौरान खेल मंत्री सतीश शर्मा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, विधायक विक्रम रंधावा, जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव बृजमोहन शर्मा, मंडलायुक्त कश्मीर विजय कुमार बिधूड़ी, जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सचिव हरविंदर काैर ने भी डॉ. मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कहा, डॉ. मुखर्जी की प्रेरणा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से जम्मू-कश्मीर कीर्तिमान रच रहा है। श्रीनगर के टैगोर हाॅल में आयोजित समारोह में सिन्हा ने कहा कि डाॅ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ एकीकृत करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। वह एक राष्ट्र, एक संविधान के समर्थक थे और अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए लड़ते हुए श्रीनगर में उनकी शहादत देश के इतिहास में निर्णायक क्षण रहा। अगस्त, 2019 के बाद प्रदेश की उपलब्धियां डॉ. मुखर्जी के सपने और पीएम मोदी के संकल्प से प्रेरित हैं।
2027 तक स्कूल-कॉलेज में
आयोजित की जाए प्रदर्शनी
एलजी ने संस्कृति, स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को जुलाई 2025 से जुलाई 2027 तक हर स्कूल, हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन व कार्यों पर प्रदर्शनी, व्याख्यान आयोजित करने का सुझाव दिया। कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में सप्ताह भर चलने वाली प्रदर्शनी और उनके जीवन यात्रा को दर्शाने वाले नाट्य प्रदर्शन आयोजित होने चाहिए।
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कश्मीरी भाषा में नए आपराधिक
कानूनों का अनुवाद किया जारी
उपराज्यपाल ने कश्मीरी भाषा में नए आपराधिक कानूनों का अनुवाद जारी किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) क्षेत्रीय कार्यालय और संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. मुखर्जी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस दौरान खेल मंत्री सतीश शर्मा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, विधायक विक्रम रंधावा, जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी, संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव बृजमोहन शर्मा, मंडलायुक्त कश्मीर विजय कुमार बिधूड़ी, जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सचिव हरविंदर काैर ने भी डॉ. मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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