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Jammu News: उर्दू की अनिवार्यता और आरक्षण पर प्रदेश के नेता भी लड़ाई में कूदे
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इसके साथ नेता प्रतिपक्ष की खबर आ रही है....अंतिम एलजी को पत्र लिखा है.
सीएम के कैबिनेट बैठक में सब-कमेटी रिपोर्ट रखे जाने के आश्वासन के बावजूद छात्र विरोध की राह पर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती में उर्दू की अनिवार्यता और आरक्षण को लेकर रस्साकशी रुकने का नाम नहीं ले रही। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आगामी दिनों में होने वाली कैबिनेट बैठक में आरक्षण मसले पर सब-कमेटी की रिपोर्ट रखे जाने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद छात्र संगठन विरोध की राह पर हैं। अब प्रदेश के नेता भी इस लड़ाई में कूद गए हैं।
प्रदेश की पूर्व राज्य मंत्री प्रिया सेठी ने अपने एक्स हैंडल से जम्मू के युवाओं के साथ खड़े होने का दम भरा। उन्होंने हालिया विज्ञापित नायब तहसीलदार के पदों के लिए उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव बताया और कहा कि ऐसे पक्षपातपूर्ण चलन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने साफ कहा कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। अगर कोई एससी/एसटी वाला आर्थिक रूप से संपन्न है तो फिर उसे आरक्षण की जरूरत कहां है। उन्होंने यह भी कहा कि एक परिवार में भी केवल एक ही व्यक्ति के लिए आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने इसे प्रदेश के ज्यादातर युवाओं के साथ नाइंसाफी करार दिया।
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जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला ने नायब तहसीलदार के पदों पर उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू के युवाओं के साथ नाइंसाफी बताया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी मसले को हल करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए, जो उमर अब्दुल्ला सरकार के पास नहीं है। उन्होंने राजस्व मंत्री रहते हुए भर्ती कराने के लिए अभ्यर्थियों को भाषा संबंधी छूट दिलाने का जिक्र किया और कहा कि जम्मू के युवाओं को उमर सरकार केवल लॉलीपॉप ही थमाते आ रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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आज हस्ताक्षर अभियान चलाएगी एबीवीपी
जम्मू। राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती से उर्दू की अनिवार्यता खत्म किए जाने और ओपन मेरिट कैटेगरी के पदों को बढ़ाए जाने को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) आज हस्ताक्षर अभियान चलाएगी। परिषद के प्रदेश मंत्री सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि नायब तहसीलदार की भर्ती में उर्दू की अनिवार्यता प्रदेश सरकार की कश्मीर सेंट्रिक सोच को दर्शाती है। जम्मू के साथ हमेशा से भेदभाव होता रहा है। ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एबीवीपी इस भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद रखेगी।
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सीएम के कैबिनेट बैठक में सब-कमेटी रिपोर्ट रखे जाने के आश्वासन के बावजूद छात्र विरोध की राह पर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती में उर्दू की अनिवार्यता और आरक्षण को लेकर रस्साकशी रुकने का नाम नहीं ले रही। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आगामी दिनों में होने वाली कैबिनेट बैठक में आरक्षण मसले पर सब-कमेटी की रिपोर्ट रखे जाने का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद छात्र संगठन विरोध की राह पर हैं। अब प्रदेश के नेता भी इस लड़ाई में कूद गए हैं।
प्रदेश की पूर्व राज्य मंत्री प्रिया सेठी ने अपने एक्स हैंडल से जम्मू के युवाओं के साथ खड़े होने का दम भरा। उन्होंने हालिया विज्ञापित नायब तहसीलदार के पदों के लिए उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव बताया और कहा कि ऐसे पक्षपातपूर्ण चलन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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वहीं, प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने साफ कहा कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए। अगर कोई एससी/एसटी वाला आर्थिक रूप से संपन्न है तो फिर उसे आरक्षण की जरूरत कहां है। उन्होंने यह भी कहा कि एक परिवार में भी केवल एक ही व्यक्ति के लिए आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने इसे प्रदेश के ज्यादातर युवाओं के साथ नाइंसाफी करार दिया।
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जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला ने नायब तहसीलदार के पदों पर उर्दू की अनिवार्यता को जम्मू के युवाओं के साथ नाइंसाफी बताया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी मसले को हल करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए, जो उमर अब्दुल्ला सरकार के पास नहीं है। उन्होंने राजस्व मंत्री रहते हुए भर्ती कराने के लिए अभ्यर्थियों को भाषा संबंधी छूट दिलाने का जिक्र किया और कहा कि जम्मू के युवाओं को उमर सरकार केवल लॉलीपॉप ही थमाते आ रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आज हस्ताक्षर अभियान चलाएगी एबीवीपी
जम्मू। राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार की भर्ती से उर्दू की अनिवार्यता खत्म किए जाने और ओपन मेरिट कैटेगरी के पदों को बढ़ाए जाने को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) आज हस्ताक्षर अभियान चलाएगी। परिषद के प्रदेश मंत्री सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि नायब तहसीलदार की भर्ती में उर्दू की अनिवार्यता प्रदेश सरकार की कश्मीर सेंट्रिक सोच को दर्शाती है। जम्मू के साथ हमेशा से भेदभाव होता रहा है। ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एबीवीपी इस भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद रखेगी।