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Jammu News: सदन में वक्फ विधेयक पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में नेकां

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आपात बैठक में विधेयक पर सदन में चर्चा और एलजी के आदेश पर हुए तबादले को लेकर विरोध की रणनीति अपनाने का दबाव
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विधायकों व पार्टी ने लिया संकल्प, जरूरत पड़ी तो जंतर-मंतर में देंगे धरना
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। वक्फ विधेयक को लेकर शुक्रवार को आपात बैठक में निंदा प्रस्ताव पास करने के बाद नेशनल काॅन्फ्रेंस (नेकां) सदन में स्थगन प्रस्ताव लाने का मन बना चुकी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में हुई आपात बैठक में इस पर सहमति बनी है। हालांकि स्थगन प्रस्ताव को लेकर स्पष्ट तौर पर कोई बोलने को तैयार नहीं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सात से नौ अप्रैल के बीच विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण में नेकां विधायक सदन में वक्फ बिल पर चर्चा के लिए एक स्थगन प्रस्ताव भी पेश करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में विधायकों और पार्टी ने वक्फ विधेयक की निंदा करने के साथ ही इस पर सदन में चर्चा को लेकर मांग की। सभी ने एकमत होकर दबाव बनाया। इसके बाद तय हुआ कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम के नियम 56 के तहत वक्फ संशोधन विधेयक पर तत्काल चर्चा कराने के लिए सदन के निर्धारित कार्य को स्थगित करने के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सदन हंगामेदार हो सकता है।
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अब विरोध के रास्ते पर चलने की तैयारी, विधायकों व पार्टी ने बनाया दबाव
एक तरफ वक्फ विधेयक उपराज्यपाल के आदेश पर हुए जेकेएएस अफसरों के तबादलों के बाद नेकां ने विरोध के रास्ते पर आगे बढ़ने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा शुक्रवार को बुलाई गई आपात बैठक में विधायकों व पार्टी ने विरोध दर्ज कराने के लिए दबाब बनाया। बिना उपराज्यपाल का नाम लिए तबादलों को उन्होंने सरकार के अधिकारों में हस्तक्षेप करार दिया और जरूरत पड़ने पर जंतर-मंतर पहुंच कर विरोध दर्ज कराने का संकल्प भी जताया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में हुई बैठक में सभी विधायक केंद्र को चेतावनी देने वाले लहजे में इस निष्कर्ष पर एकमत हुए कि अब समन्वय से इतर दूसरा रास्ता भी अपनाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद एक नेता ने सलाह दी कि जिन जेकेएएस अधिकारियों का हाल ही में तबादला किया गया, उनके तबादले को लेकर मुख्यमंत्री एक नया आदेश जारी करें। इस आदेश को जीएडी को भेजा जाए और यदि विभाग इसका क्रियान्वयन नहीं करता तो विधायकों को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए भेजा जाए। सूत्रों का कहना है कि दो घंटे तक चली बैठक में प्रशासनिक तबादलों के साथ ही साथ राजनीतिक परिदृश्य पर भी चर्चा हुई। देखना यह है कि नेकां और एलजी प्रशासन के बीच यह तनातनी कहां तक पहुंचती है।
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महराज मलिक ने केंद्र पर साधा
निशाना, कहा-धर्म के ठेकेदार न बनो

बैठक से बाहर आने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक महराज मलिक ने केंद्र पर निशाना साधा। कहा कि ये लोग मंदिरों और मस्जिदों को उठाकर सरकार के अहाते में ले रहे हैं, इससे साफ जाहिर है कि देश के अंदर हो क्या रहा है। वक्फ विधेयक की हम निंदा करते हैं। कहा कि देश के हालात बद से बदतर हैं और केंद्र अपनी तानाशाही कर रहा है। हम इस तानाशाही का जवाब पूरी ताकत से देंगे, यह इस भ्रम में न रहे। मलिक ने कहा कि इनको बता दो कि देश के लोगों के साथ छेड़छाड़ न करो, धर्म के ठेकेदार न बनो। इस देश को आगे बढ़ाने के लिए स्कूलों को बेहतर बनाओ, भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ। देश के अंदर माफियाराज न चलाओ, अगर ऐसा ही जम्मू कश्मीर के अंदर भी करने की कोशिश की तो पूरी ताकत से रोके जाओगे।
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