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नैतिक व आध्यात्मिक चौराहे पर खड़ा राष्ट्र, जागरूकता लानी होगी : मीरवाइज
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- सरकार से धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की। उन्होंने नवाजियों के समक्ष अपना खुत्बा पेश किया। मीरवाइज ने कहा, हमें खुद से पूछना चाहिए एक राष्ट्र के रूप में हम कहां जा रहे हैं? हमारी नैतिकता और मूल्य खत्म हो रहे हैं। झूठ, छल और स्वार्थ ने जड़ें जमा ली हैं। सच्ची आस्था की तलाश करने के बजाय, हम अंधविश्वासों में फंस गए हैं।
मीरवाइज ने कहा, अब सबसे भयावह वास्तविकता - एजाज शेख है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने दशकों तक हजारों छोटे बच्चों की जिंदगी बर्बाद की है। ऐसे अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। हम सख्त सजा की मांग करते हैं ताकि कोई दोबारा ऐसा अपराध करने की हिम्मत न करे। मीरवाइज ने कहा, हमारा समाज ड्रग्स, घोटालों और ऑनलाइन जुए में डूब रहा है। सामाजिक बुराइयां युवाओं को भटका रही हैं और हमारे नैतिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने सभी इमामों और खतीबों से अपने उपदेशों में इन चिंताओं को उठाने का आग्रह किया। हमें लोगों को उन खतरों के प्रति जागरूक करना चाहिए, जो हमारे चारों ओर हैं और उन्हें नेकी के रास्ते पर वापस लाना चाहिए।
उमर फारूक ने कहा कि इस बात से दुख है कि जामिया मस्जिद में शब-ए-बारात की नमाज की अनुमति नहीं दी गई। मुझे फिर से घर में नजरबंद कर दिया गया। यह सब बंद होना चाहिए। उन्होंने सरकार से धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की मांग है।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की। उन्होंने नवाजियों के समक्ष अपना खुत्बा पेश किया। मीरवाइज ने कहा, हमें खुद से पूछना चाहिए एक राष्ट्र के रूप में हम कहां जा रहे हैं? हमारी नैतिकता और मूल्य खत्म हो रहे हैं। झूठ, छल और स्वार्थ ने जड़ें जमा ली हैं। सच्ची आस्था की तलाश करने के बजाय, हम अंधविश्वासों में फंस गए हैं।
मीरवाइज ने कहा, अब सबसे भयावह वास्तविकता - एजाज शेख है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने दशकों तक हजारों छोटे बच्चों की जिंदगी बर्बाद की है। ऐसे अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। हम सख्त सजा की मांग करते हैं ताकि कोई दोबारा ऐसा अपराध करने की हिम्मत न करे। मीरवाइज ने कहा, हमारा समाज ड्रग्स, घोटालों और ऑनलाइन जुए में डूब रहा है। सामाजिक बुराइयां युवाओं को भटका रही हैं और हमारे नैतिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने सभी इमामों और खतीबों से अपने उपदेशों में इन चिंताओं को उठाने का आग्रह किया। हमें लोगों को उन खतरों के प्रति जागरूक करना चाहिए, जो हमारे चारों ओर हैं और उन्हें नेकी के रास्ते पर वापस लाना चाहिए।
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उमर फारूक ने कहा कि इस बात से दुख है कि जामिया मस्जिद में शब-ए-बारात की नमाज की अनुमति नहीं दी गई। मुझे फिर से घर में नजरबंद कर दिया गया। यह सब बंद होना चाहिए। उन्होंने सरकार से धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की मांग है।
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