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सत्ता के लिए भाजपा को समर्थन देने को तैयार थी नेकां : राणा
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वाररूम में पत्रकारों से रूबरू होते भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा
- इसके साथ नेकां का वर्जन दिया जाएगा
- 2014 में पूर्ण अवधि के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री पर सहमति जताई थी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा ने खुलासा किया कि 2014 में सत्ता में आने के लिए नेकां ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में भाजपा और आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर पूर्ण अवधि के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री पर सहमति जताई थी।
छन्नी हिम्मत स्थित पार्टी के वाररूम में मंगलवार को प्रेसवार्ता में राणा ने कहा कि आज उमर कह रहे हैं कि कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियां भाजपा का हिस्सा हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। वह कह रहे हैं कि राममाधव पीडीपी के करीब हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि आपने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए बार-बार भाजपा और आरएसएस से संपर्क किया था। उमर भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और आज कह रहे हैं कि नेकां का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं। 2014 में नेकां के पास 15 विधायक थे। उमर दिल्ली गए और गृहमंत्री अमित शाह, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर प्रभारी राममाधव सहित आरएसएस नेताओं के दरवाजे खटखटाकर समर्थन देने की पेशकश की, लेकिन भाजपा ने इसे ठुकरा दिया था। मैं भी उस समय उमर के साथ था। पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के देहांत के बाद उमर ने फिर से दिल्ली में भाजपा और आरएसएस के शीर्ष नेताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया था। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी। उस समय डाॅ. फारूक अब्दुल्ला कटड़ा में थे। उन्होंने उमर से दिल्ली में भाजपा और आरएसएस नेताओं से मिलने व जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के लिए भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश करने को कहा था। भाजपा ने उस समय भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
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जम्मू-कश्मीर में दोबारा अशांति चाहती है नेकां : राणा
राणा ने कहा, नेकां कश्मीर में भाजपा के सभी दलों से जुड़ने की बात कहकर केवल नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। नेकां जेल में बंद पत्थरबाजों को रिहा करने की बात करती है, जिससे पता चलता है कि वह जम्मू-कश्मीर में दोबारा अशांति चाहती है। राणा ने सवाल किया क्या नेकां 2009 और 2010 भूल गए हैं? भाजपा नेकां को हिंदुओं की भावनाओं से खेलने की कभी इजाजत नहीं देगी, क्योंकि उसने अपने घोषणापत्र में शंकराचार्य मंदिर का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान रखने का उल्लेख किया है। मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह, प्रदेश प्रवक्ता और वाररूम प्रभारी अरुण गुप्ता, मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप महोत्रा मौजूद रहे।
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- 2014 में पूर्ण अवधि के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री पर सहमति जताई थी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राणा ने खुलासा किया कि 2014 में सत्ता में आने के लिए नेकां ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में भाजपा और आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर पूर्ण अवधि के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री पर सहमति जताई थी।
छन्नी हिम्मत स्थित पार्टी के वाररूम में मंगलवार को प्रेसवार्ता में राणा ने कहा कि आज उमर कह रहे हैं कि कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियां भाजपा का हिस्सा हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। वह कह रहे हैं कि राममाधव पीडीपी के करीब हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि आपने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए बार-बार भाजपा और आरएसएस से संपर्क किया था। उमर भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और आज कह रहे हैं कि नेकां का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं। 2014 में नेकां के पास 15 विधायक थे। उमर दिल्ली गए और गृहमंत्री अमित शाह, तत्कालीन जम्मू-कश्मीर प्रभारी राममाधव सहित आरएसएस नेताओं के दरवाजे खटखटाकर समर्थन देने की पेशकश की, लेकिन भाजपा ने इसे ठुकरा दिया था। मैं भी उस समय उमर के साथ था। पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के देहांत के बाद उमर ने फिर से दिल्ली में भाजपा और आरएसएस के शीर्ष नेताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया था। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की थी। उस समय डाॅ. फारूक अब्दुल्ला कटड़ा में थे। उन्होंने उमर से दिल्ली में भाजपा और आरएसएस नेताओं से मिलने व जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन के लिए भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश करने को कहा था। भाजपा ने उस समय भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
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जम्मू-कश्मीर में दोबारा अशांति चाहती है नेकां : राणा
राणा ने कहा, नेकां कश्मीर में भाजपा के सभी दलों से जुड़ने की बात कहकर केवल नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। नेकां जेल में बंद पत्थरबाजों को रिहा करने की बात करती है, जिससे पता चलता है कि वह जम्मू-कश्मीर में दोबारा अशांति चाहती है। राणा ने सवाल किया क्या नेकां 2009 और 2010 भूल गए हैं? भाजपा नेकां को हिंदुओं की भावनाओं से खेलने की कभी इजाजत नहीं देगी, क्योंकि उसने अपने घोषणापत्र में शंकराचार्य मंदिर का नाम बदलकर तख्त-ए-सुलेमान रखने का उल्लेख किया है। मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह, प्रदेश प्रवक्ता और वाररूम प्रभारी अरुण गुप्ता, मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप महोत्रा मौजूद रहे।
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