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अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब डोगरी भाषा की नहीं होगी अपेक्षा
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जम्मू। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद डोगरी भाषा की अपेक्षा नहीं होगी। वर्षों से डोगरी भाषा अपेक्षा का शिकार रही है। इसके चलते डोगरी भाषा का संपूर्ण विकास नहीं हो पाया। यह बात केंद्रीय राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कुंवर वियोगी आडिटोरियम के लोकार्पण कार्यक्रम में कही। इस कार्यक्रम का आयोजन डोगरी संस्था जम्मू और कुंवर वियोगी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में 2019 के लिए कुंवर वियोगी साहित्य पुरस्कार व कुंवर वियोगी साहित्य-कला पुरस्कार भी दी गए।
रविवार को कर्ण नगर स्थिति नवनिर्मित कुंवर वियोगी आडिटोरियम का शुभारंभ किया गया। यह आडिटोरियम डोगरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार व साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कुंवर वियोगी को समर्पित किया गया है। इस दौरान रोशन लाल को कुंवर वियोगी साहित्यकार पुरस्कार और दिवंगत लेखक छत्रपाल को कुंवर वियोगी साहित्य कला पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार में मैडल, शाल और चैक दिए गए। इस दौरान डोगरी संस्था के अध्यक्ष ललित मंगोत्रा ने कहा कि डोगरी भाषा के विकास के लिए संस्था 1944 से काम कर रही है। कुंवर वियोगी आडिटोरियम का बनना और उद्घाटन होना लेखकों और साहित्यकारों के लिए बड़ा दिन है। कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भाषा के विकास में तीन बातें होती हैं। पहली हमें अपनी भाषा पर मान होना चाहिए, दूसरा भाषा में साहित्य होना चाहिए और तीसरा भाषा को रोजगार का जरिया बनाना चाहिए। कार्यक्रम में कुंवर वियोगी मेमोरियल ट्रस्ट के सदस्य व काफी संख्या में साहित्यकार मौजूद रहे।
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रविवार को कर्ण नगर स्थिति नवनिर्मित कुंवर वियोगी आडिटोरियम का शुभारंभ किया गया। यह आडिटोरियम डोगरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार व साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कुंवर वियोगी को समर्पित किया गया है। इस दौरान रोशन लाल को कुंवर वियोगी साहित्यकार पुरस्कार और दिवंगत लेखक छत्रपाल को कुंवर वियोगी साहित्य कला पुरस्कार दिया गया। पुरस्कार में मैडल, शाल और चैक दिए गए। इस दौरान डोगरी संस्था के अध्यक्ष ललित मंगोत्रा ने कहा कि डोगरी भाषा के विकास के लिए संस्था 1944 से काम कर रही है। कुंवर वियोगी आडिटोरियम का बनना और उद्घाटन होना लेखकों और साहित्यकारों के लिए बड़ा दिन है। कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भाषा के विकास में तीन बातें होती हैं। पहली हमें अपनी भाषा पर मान होना चाहिए, दूसरा भाषा में साहित्य होना चाहिए और तीसरा भाषा को रोजगार का जरिया बनाना चाहिए। कार्यक्रम में कुंवर वियोगी मेमोरियल ट्रस्ट के सदस्य व काफी संख्या में साहित्यकार मौजूद रहे।
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