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प्लास्टिक कारोबार पर मार
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जम्मू। सिंगल यूज प्लास्टिक के कारोबार से जुड़े लोगों की छुट्टी होना शुरू हो गई है। इस व्यवसाय में शामिल दर्जनों कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। इस बार उनकी दिवाली भी फीकी जाएगी। नई व्यवस्था पर संबंधित विभागों की ओर से कोई गाइडलाइन जारी नहीं होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस कारोबार से जुड़ी कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं। इससे सैकड़ों लोगों को प्रभावित होना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने 2022 तक भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने पर जोर दिया है।
जम्मू के मुट्ठी, बाड़ी ब्राह्मणा और बीरपुर में तीन फैक्ट्रियां सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन कर रही थीं, लेकिन प्रधानमंत्री का सिंगल यूज प्लास्टिक प्रयोग में न लाने के संकल्प के बाद इन फैक्ट्रियों के उत्पादन पर ब्रेक लग गया है। बीरपुर कांप्लेक्स में शालीमार थर्मो फार्मिंग प्राइवेट लिमिटेड के एससी दत्ता ने बताया कि उन्हें मजबूरन फैक्ट्री में लगे 25 कर्मचारियों को निकालना पड़ा है। सिर्फ पांच ही कर्मचारी बचे हैं। उनकी फैक्ट्री में सिंगल यूज प्लास्टिक के लिए 250 से अधिक माइक्रोन पर प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे थे। लेकिन नई व्यवस्था में माइक्रोन का कोई पैमाना तय नहीं किया गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक में ग्लास, कटोरी, कंटेनर, प्लेट आदि का उत्पादन किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जिस तरह पॉलीथिन को 50 माइक्रोन पर तैयार करने की अनुमति है, उसी तरह अन्य पदार्थों पर भी माइक्रोन का पैमाना तय कर दिया जाए। बाजार में दही कंटेनर, आइसक्रीम कंटेनर को मान्यता दी गई है, जबकि वे भी सिंगल यूज की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्रोडक्ट के व्यवसाय में भेदभाव किया जा रहा है। हम एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) पंजीकरण करवाने के लिए भी तैयार हैं। इसके तहत वेस्ट सामग्री को वापस ले लिया जाता है। कई उद्योगों को चलाने के लिए बैंकों से लाखों रुपये का ऋण लिया गया है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोग भारी आर्थिक संकट में हैं। श्रीनगर में सचिवालय होने से किसी भी उच्चाधिकारी से बात नहीं हो पा रही है, जिससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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जम्मू के मुट्ठी, बाड़ी ब्राह्मणा और बीरपुर में तीन फैक्ट्रियां सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन कर रही थीं, लेकिन प्रधानमंत्री का सिंगल यूज प्लास्टिक प्रयोग में न लाने के संकल्प के बाद इन फैक्ट्रियों के उत्पादन पर ब्रेक लग गया है। बीरपुर कांप्लेक्स में शालीमार थर्मो फार्मिंग प्राइवेट लिमिटेड के एससी दत्ता ने बताया कि उन्हें मजबूरन फैक्ट्री में लगे 25 कर्मचारियों को निकालना पड़ा है। सिर्फ पांच ही कर्मचारी बचे हैं। उनकी फैक्ट्री में सिंगल यूज प्लास्टिक के लिए 250 से अधिक माइक्रोन पर प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे थे। लेकिन नई व्यवस्था में माइक्रोन का कोई पैमाना तय नहीं किया गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक में ग्लास, कटोरी, कंटेनर, प्लेट आदि का उत्पादन किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जिस तरह पॉलीथिन को 50 माइक्रोन पर तैयार करने की अनुमति है, उसी तरह अन्य पदार्थों पर भी माइक्रोन का पैमाना तय कर दिया जाए। बाजार में दही कंटेनर, आइसक्रीम कंटेनर को मान्यता दी गई है, जबकि वे भी सिंगल यूज की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्रोडक्ट के व्यवसाय में भेदभाव किया जा रहा है। हम एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) पंजीकरण करवाने के लिए भी तैयार हैं। इसके तहत वेस्ट सामग्री को वापस ले लिया जाता है। कई उद्योगों को चलाने के लिए बैंकों से लाखों रुपये का ऋण लिया गया है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोग भारी आर्थिक संकट में हैं। श्रीनगर में सचिवालय होने से किसी भी उच्चाधिकारी से बात नहीं हो पा रही है, जिससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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