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पुलिस की पाठशाला: 'आप हैं योद्धा, नशे व साइबर अपराध के खिलाफ जंग में दें हमारा साथ'; बोले आईजी सुनील गुप्ता

Tue, 25 Mar 2025 11:55 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 25 Mar 2025 11:55 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच के आईजी सुनील गुप्ता ने छात्रों को नशे और साइबर अपराध के खतरों से जागरूक करते हुए उन्हें इन समस्याओं के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया।

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Police School: 'You are a warrior, support us in the war against drugs and cyber crime'; said IG Sunil Gupta
कॉमर्स काॅलेज में लगी पुलिस की पाठशाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नशा कौन-कौन सा है, युवा नशे के लती क्यों बन रहे हैं, साइबर अपराध कौन-कौन से हैं....ऐसे ही कई सवाल जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच के आईजी सुनील गुप्ता ने छात्र-छात्राओं से किए। उनके उत्साह से भरे जवाब सुनकर आईजी ने कहा कि आप हैं योद्धा..., नशे और साइबर अपराध के खिलाफ जंग में हमारा साथ दीजिए। हम आपको फाइटर का प्रमाण पत्र देंगे। यह सीधा संवाद आईजी और छात्र-छात्राओं के बीच सोमवार को कॉमर्स कॉलेज में आयोजित अमर उजाला पुलिस की पाठशाला में हुआ। इस मौके पर क्लस्टर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. केएस चंद्रशेखर, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. राज श्री धर, प्रिंसिपल कामर्स कॉलेज प्रो. राजिन्दर सिंह व डॉ. रूमी रानी मौजूद रहीं।

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पाठशाला में आईजी ने शाबाशी से सभी का हौसला बढ़ाया। हंसते-हंसाते वे उन्हें कई जरूरी जानकारियों से भरा पाठ पढ़ा गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से नशा आ रहा है। अफागनिस्तान, पाकिस्तान सीरिया नशा सप्लाई करने का गोल्डन ट्राईएंगल है। बोले- हम सप्लाई रोकने पर काम कर रहे हैं। पूरी सफलता के लिए जरूरी है कि इसकी मांग कम हो। इसके लिए समाज को साथ आना होगा। आप सभी युवाओं को जुटना होगा।

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तीन मुंहवाला रावण है..लक्ष्मण रेखा पार करते ही गए
आईजी ने कहा कि नशा पारंपरिक, केमिकल और मेडिसनल ड्रग्स का तीन मुंह वाला रावण है। लक्ष्मण रेखा पार की नहीं की गए। एक दूसरे को देखकर इस दलदल में न फंसे। अगर फंस भी गए तो डरना नहीं, उचित इलाज इससे छुटकारा देगा।

20 फीसदी से अधिक लाभ का ऑफर मिले तो सतर्क हो जाएं
साइबर अपराध पर छात्राओं से कहा कि यदि आपको कहीं भी इन्वेस्ट करने पर कोई वार्षिक 20 फीसदी से अधिक लाभ देने का आफर देता है, तो समझ जाएं। आपके साथ फ्राड हो रहा है।

नए अपराधिक कानून
आईजी ने नए अपराधिक कानूनों की जानकारी दी। पुराने कानून में दंड पर जोर दिया जाता था, अब न्याय पर जोर है। जैसे मोब लिंचिंग और स्नैचिंग अब अपराध है। संगठित अपराध शामिल है। इसके तहत अब अपराध करने वाले की अपराध से बनाई कमाई को जब्त कर पीड़ित को दी जाएगी। इसके अलावा भी कई जरूरी जानकारियां दीं।

कोर्ट जाने की जरूरत नहीं, डीसी कार्यालय में दे सकेंगे गवाही
आईजी ने जानकारी दी कि अगले दो वर्ष में जिला उपायुक्त कार्यालयों में डीसी सेंटर खुलने जा रहे हैं। इसके माध्यम से किसी मामले की गवाही देने के लिए कोट्र जाने की जरूरत नहीं। डीसी सेंटर में जाकर भी गवाही भी दे सकते हैं। अस्पतालों से गवाही भी दे सकते हैं।

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खुद के जानने वालों का उदाहरण देकर साइबर अपराध के खतरों से किया आगाह

  • ऑनलाइन जुआ: आईजी ने कहा कि यदि आप सोच रहे हैं कि कहीं पर दो हजार रुपये जमा करके अगले महीने चार हजार रुपये पा लेंगे तो आप मूर्खता कर रहे हैं। कहा- एक एमबीए करने वाली युवती ऐसे ही माया जाल में फंसी। एक ही रात में लाक लाख रुपये चले गए।
  • पिग बुचरिंग: आईजी ने कहा कि मेरे कुक का दामाद सैन्यकर्मी है। 17 लाख रुपये उसने पिग बुचरिंग में गंवा दिए। पहले थोड़े पैसे जमा किए, इस पर कुछ पैसे बढ़े हुए मिले। बाद में खोया हुआ पैसा वापस लाने के चक्कर में 17 लाख रुपये चले गए।
  • साइबर स्लेवरी: जाॅब के नाम पर विदेश बुला लेंगे। बंदी बनाकर काल सेंटर में साइबर अपराध कराएंगे।
  • डिजिटल अरेस्ट: वीडियो काल करके अरेस्ट हो सकते हैं। आपको सीबीआई या पुलिस का अधिकार बनकर फोन करेंगे, डराएंगे और पैसे ऐंठ लेंगे।

स्टूडेंट्स की सक्रियता से प्रभावित हुए, कहा-आपको दिए जाएंगे प्रमाणपत्र
छात्र-छात्राओं के सवाल-जवाब को सुनकर,उनकी सक्रियात से आईजी बहुत प्रभावित हुए। कहा कि आपको प्रमाण पत्र दूंगा। जिन्हें प्रमाण दिया जाएगा, उनमें विशेष रैना, आकृति, अक्षदेव सिंह, इमरान हाशमी, साइमा तबस्सुम, अभिषेक चौधरी, नीतीश कुमार, रसिका पठानिया व मो. अयूब शामिल हैं।

संचार करते वक्त रहें सतर्क
एक वक्त था जब लैंडलाइन का इस्तेमाल होता था। अब मोबाइल फोन का इस्तेमाल हो रहा है। पहले सामान्य फोन थे और अब स्मार्ट फोन हैं। बदलते समय के साथ चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों को बदलते समय के साथ बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। के एस चंद्रशेखर, वीसी, क्लस्टर यूनिवर्सिटी

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