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Pharmacist Day: जम्मू-कश्मीर में 12 हजार फार्मासिस्टों को पंजीकरण का इंतजार
Sun, 25 Sep 2022 05:18 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sun, 25 Sep 2022 05:18 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के पहले प्रदेश में 8 से 10 हजार ऐसे विद्यार्थी थे, जो फार्मासिस्ट से पास आउट हुए थे या डिप्लोमा कर रहे थे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत करीब 1200 फार्मासिस्टों ने भी पंजीकरण नहीं करवाया है।
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विश्व फार्मासिस्ट दिवस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में करीब 12 हजार फार्मासिस्टों को पंजीकरण का इंतजार है। अनुच्छेद 370 के दौरान प्रदेश में फार्मासिस्टों का स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अधीन जम्मू-कश्मीर फार्मेसी एक्ट, समवात 2011 (1955 एडी) के तहत पंजीकरण हो रहा था। अक्तूबर 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद केंद्रीय अधिनियम लागू होने से यह फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत होने लगा, लेकिन इसमें उन्हीं फार्मासिस्टों को दोबारा पंजीकरण की अनुमति दी गई, जो पहले से पंजीकृत थे। इसके लिए एक साल का समय दिया गया, लेकिन दो साल से फार्मासिस्ट के लिए नया पंजीकरण नहीं हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के पहले प्रदेश में 8 से 10 हजार ऐसे विद्यार्थी थे, जो फार्मासिस्ट से पास आउट हुए थे या डिप्लोमा कर रहे थे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत करीब 1200 फार्मासिस्टों ने भी पंजीकरण नहीं करवाया है। फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत उन्हीं फार्मासिस्टों को पंजीकरण किया जाएगा, जिन्होंने इसी एक्ट के तहत डिप्लोमा किया है।
इस मामले को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष उठाया गया, जिसके बाद अक्तूबर 2020 से लेकर अक्तूबर 2021 तक एक साल की अवधि में पुराने पंजीकृत फार्मासिस्टों को दोबारा पंजीकरण के लिए कहा गया। लेकिन पहले से डिप्लोमा होल्डरों को नया पंजीकरण की अनुमति नहीं दी गई है।
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इस मामले में गृह मंत्रालय की ओर से मुख्य सचिव से पंजीकरण अवधि के लिए सुझाव मांगा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी कोई जवाब नहीं भेजा है। ड्रग कंट्रोलर लोतिका खजूरिया का कहना है कि अभी नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत फार्मेसी करने वाले ही पंजीकृत हो रहे हैं।
सरकार मामले को गंभीरता से ले
नए पंजीकरण की प्रक्रिया नहीं होने से हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। - सुशील सूदन, वरिष्ठ फार्मासिस्ट एवं प्रधान, जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन।
35 साल की नौकरी के बाद भी पंजीकरण नहीं
कई फार्मासिस्ट दूरदराज के क्षेत्रों में सालों तैनात रहे हैं। ऐसे में उन्होंने खुद को पंजीकृत नहीं कराया। इनमें कई ऐसे भी हैं जिन्होंने 35 साल तक स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दीं, लेकिन अब पंजीकरण नहीं होने से वह दवा की दुकान भी नहीं खोल सकते हैं। - सुभाष चौधरी, फार्मासिस्ट।
हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर
हजारों बच्चे प्रदेश के पुनर्गठन से पहले बी या डी फार्मेसी कर रहे थे। ऐसे में पंजीकरण न होने से उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। उन्हें पुराने एक्ट के तहत फार्मेसी का कोई लाभ नहीं मिलेगा। - राजेंद्र पाल, फार्मासिस्ट।
सभी फार्मासिस्टों को पंजीकृत करें
जो लोग बाहर से फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत फार्मासिस्ट डिप्लोमा कर रहे हैं, उन्हें तो पंजीकृत किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश के हजारों युवाओं को ऐसी सुविधा नहीं दी जा रही है। - मदन लाल शर्मा, फार्मासिस्ट।
जल्द लिया जाए फैसला
सरकार को फार्मासिस्टों और इससे संबंधि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लेना चाहिए। ये फार्मासिस्ट काफी समय से फैसले की राह देख रहे हैं। - कमलजीत साहली, फार्मासिस्ट।
पहले फार्मासिस्ट को कहते थे कपाउंडर
देशभर में 1972 से पहले फार्मासिस्ट को कंपाउडर कहा जाता था, जो दवाओं का मिश्रण करते थे। इसके बाद दवाओं की स्ट्रिप आना शुरू हो गई और इन्हें फार्मासिस्ट कहा जाने लगा। उस समय भी जम्मू-कश्मीर में फार्मासिस्ट कहलाने के लिए 14 दिन का संघर्ष किया गया था। स्वास्थ्य क्षेत्र में फार्मासिस्ट की भूमिका अहम होती है, जो डॉक्टर की लिखी दवाई को मरीज को देने का काम करता है। डॉक्टर के बाद फार्मासिस्ट को ही दवा की सही जानकारी होती है।
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जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के पहले प्रदेश में 8 से 10 हजार ऐसे विद्यार्थी थे, जो फार्मासिस्ट से पास आउट हुए थे या डिप्लोमा कर रहे थे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत करीब 1200 फार्मासिस्टों ने भी पंजीकरण नहीं करवाया है। फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत उन्हीं फार्मासिस्टों को पंजीकरण किया जाएगा, जिन्होंने इसी एक्ट के तहत डिप्लोमा किया है।
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इस मामले को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष उठाया गया, जिसके बाद अक्तूबर 2020 से लेकर अक्तूबर 2021 तक एक साल की अवधि में पुराने पंजीकृत फार्मासिस्टों को दोबारा पंजीकरण के लिए कहा गया। लेकिन पहले से डिप्लोमा होल्डरों को नया पंजीकरण की अनुमति नहीं दी गई है।
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इस मामले में गृह मंत्रालय की ओर से मुख्य सचिव से पंजीकरण अवधि के लिए सुझाव मांगा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी कोई जवाब नहीं भेजा है। ड्रग कंट्रोलर लोतिका खजूरिया का कहना है कि अभी नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत फार्मेसी करने वाले ही पंजीकृत हो रहे हैं।
सरकार मामले को गंभीरता से ले
नए पंजीकरण की प्रक्रिया नहीं होने से हजारों लोगों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। - सुशील सूदन, वरिष्ठ फार्मासिस्ट एवं प्रधान, जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन।
35 साल की नौकरी के बाद भी पंजीकरण नहीं
कई फार्मासिस्ट दूरदराज के क्षेत्रों में सालों तैनात रहे हैं। ऐसे में उन्होंने खुद को पंजीकृत नहीं कराया। इनमें कई ऐसे भी हैं जिन्होंने 35 साल तक स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दीं, लेकिन अब पंजीकरण नहीं होने से वह दवा की दुकान भी नहीं खोल सकते हैं। - सुभाष चौधरी, फार्मासिस्ट।
हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर
हजारों बच्चे प्रदेश के पुनर्गठन से पहले बी या डी फार्मेसी कर रहे थे। ऐसे में पंजीकरण न होने से उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। उन्हें पुराने एक्ट के तहत फार्मेसी का कोई लाभ नहीं मिलेगा। - राजेंद्र पाल, फार्मासिस्ट।
सभी फार्मासिस्टों को पंजीकृत करें
जो लोग बाहर से फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत फार्मासिस्ट डिप्लोमा कर रहे हैं, उन्हें तो पंजीकृत किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश के हजारों युवाओं को ऐसी सुविधा नहीं दी जा रही है। - मदन लाल शर्मा, फार्मासिस्ट।
जल्द लिया जाए फैसला
सरकार को फार्मासिस्टों और इससे संबंधि विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लेना चाहिए। ये फार्मासिस्ट काफी समय से फैसले की राह देख रहे हैं। - कमलजीत साहली, फार्मासिस्ट।
पहले फार्मासिस्ट को कहते थे कपाउंडर
देशभर में 1972 से पहले फार्मासिस्ट को कंपाउडर कहा जाता था, जो दवाओं का मिश्रण करते थे। इसके बाद दवाओं की स्ट्रिप आना शुरू हो गई और इन्हें फार्मासिस्ट कहा जाने लगा। उस समय भी जम्मू-कश्मीर में फार्मासिस्ट कहलाने के लिए 14 दिन का संघर्ष किया गया था। स्वास्थ्य क्षेत्र में फार्मासिस्ट की भूमिका अहम होती है, जो डॉक्टर की लिखी दवाई को मरीज को देने का काम करता है। डॉक्टर के बाद फार्मासिस्ट को ही दवा की सही जानकारी होती है।