पढ़िए, कैसे सरहद पार से आ रही गानों की फरमाइश
आकाशवाणी कठुआ द्वारा कार्यक्रमों में किए गए बदलाव श्रोताओं को खूब रास आने लगे हैं। यहां के कार्यक्रम न सिर्फ जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले बल्कि सांबा, उधमपुर, पंजाब, हिमाचल और बार्डर के उस पार तक गूंजते हैं।
दोनों देशों की दूरियों को मिटाते हुए आकाशवाणी कठुआ के टेलीफोन पर कई बार पाकिस्तान की सीमा से सटे शहरों से भी गानों की फरमाइशें आती रहीं हैं।
इतना ही नही एफएम 102.2 मेगाहर्टज पर सुने जाने वाले रेडियो कठुआ ने पिछले ढाई दशक में प्रादेशिक भाषाओं को मिलाने का भी काम किया है।
डोगरी, पहाड़ी, गोजरी, पंजाबी और हिमाचली संस्कृतियों पर आधारित गीत लोगों के मनपसंद हैं, जिन्हें सुनने के लिए लगातार लोग फरमाइश करते हैं।
आकाशवाणी कठुआ के प्रोगाम एग्सीक्यूटिव रेणू रैणा ने बताया कि अक्तूबर माह से आकाशवाणी कठुआ नए कार्यक्रमों को लेकर आया है, जिसमें डोगरी गीतों का फरमाइशी कार्यक्रम तुंदे फोन तुंदे गीत भी शामिल है।
कई नए कार्यक्रम किए शामिल
स्थानीय कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हुए सुबह की सभा का समय बढ़ाया गया है और दोपहर बारह बजे से डेढ़ बजे तक स्थानीय कार्यक्रमों को आकाशवाणी कठुआ से प्रस्तुत किया जा रहा है।
इसमें अब कार्यक्रम सैनिकों के लिए भी शामिल हैं, जो पिछले कुछ समय से रात दस बजे था। इसी तरह से रात की सभा में भी नए कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।
डियो कठुआ ने दोनों देशों की दूरियों को मिटाने का काम किया है। सीमा के उस पार पाकिस्तान से भी कई बार फोन कॉल्स पर श्रोता अपनी फरमाइश इस कार्यक्रम में शामिल करवा चुके हैं।
गुजरांवाला से अल्लाह बसाया और सियालकोट से हुसल बाला ने कई बार रेडियो कठुआ के फोन इन कार्यक्रम में भाग लिया। यहां उन्होंने दोनों देशों में शांति स्थापित करने और आम लोगों की दिक्कतों की बात कही। वहीं वहां की संस्कृति से भी रू-ब-रू करवाया।