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कृषि मेले में उपयोग किए गए फूलों के खिलौने देख लोग हैरान
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शेरे-ए- कशमीर कृषि विशवविद्यलाय कृषि व साईस टेक्नोलजी जम्मू चठ्ठा लगे मेले के दूसरे दिन खरीददारी
- फोटो : RSPURA
मीरां साहिब। किसान मेले में दूसरे दिन बड़ी संख्या में स्थानीय के अलावा दूसरे जिलों के लोग भी पहुंचे। उन्होंने बीजों के अलावा अन्य उपकरणों के बारे में विस्तार से जाना। कई किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से फसलों और बीजों के बारे में चर्चा भी की।
शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय चट्ठा में पांच दिवसीय किसान मेले का आयोजन करवाया जा रहा है। बुधवार को कई स्टालों से महिलाओं और युवतियों ने कपड़ों की खरीदारी कर मेले का आनंद उठाया।। वंदना, पलक डोगरा ने बताया कि कई किस्म के फूलों की पौध उन्होंने खरीदी है। उन्हें पहली बार दर्जनों किस्म के फूलों के बारे में जानकारी मिली। इसके अलावा एक साथ कई बेहतरीन फूल भी देखने को मिली।
वूल व वूलन एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल के उपाध्यक्ष रोमेश खजूरिया ने बताया कि इस प्रकार के मेले ब्लाक स्तर पर भी लगाए जाने चाहिए। जिससे किसानों को उन्नत खेती करने के तरीके और उपकरणों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि बीजों और उसको लगाने का तरीका जानकार किसान पैदावार बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के साथ हस्तशिल्प और बागवानी से जुड़े लोग और बेहतर फसल उगा सकते हैं। उपयोग किए गए फूलों से बनाए खिलौनों को मेले में सेल्फ हेल्प ग्रुप सेवा भारती ने प्रदर्शित किया है। स्टाल चला रही मधू वंडराल ने बताया कि धार्मिक स्थानों पर फूलों की माला चढ़ाई जाती है। इसके बाद फूल खराब होने पर उन्हेें फेंक दिया जाता है। उनके ग्रुप ने इन फूलों को एकत्र कर इसके खिलौने बनाए हैं। इसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। रियासी में वह महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दे रही हैं।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सराहा
मेले के दौरान पर्यटन विभाग ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाए। इसमें गायकों ने हिन्दी, पंजाबी, डोगरी, पहाड़ी गीतों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। प्रसिद्ध गायक तिलक राज टगोत्रा ने डोगरी में पापा रेल गड्डी आई पर, पाहडे चे रेल गड्डी आई सुनाने पर पंडाल में बैठे लोगों ने तालियां बजाकर सराहा।
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शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय चट्ठा में पांच दिवसीय किसान मेले का आयोजन करवाया जा रहा है। बुधवार को कई स्टालों से महिलाओं और युवतियों ने कपड़ों की खरीदारी कर मेले का आनंद उठाया।। वंदना, पलक डोगरा ने बताया कि कई किस्म के फूलों की पौध उन्होंने खरीदी है। उन्हें पहली बार दर्जनों किस्म के फूलों के बारे में जानकारी मिली। इसके अलावा एक साथ कई बेहतरीन फूल भी देखने को मिली।
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वूल व वूलन एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल के उपाध्यक्ष रोमेश खजूरिया ने बताया कि इस प्रकार के मेले ब्लाक स्तर पर भी लगाए जाने चाहिए। जिससे किसानों को उन्नत खेती करने के तरीके और उपकरणों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि बीजों और उसको लगाने का तरीका जानकार किसान पैदावार बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि के साथ हस्तशिल्प और बागवानी से जुड़े लोग और बेहतर फसल उगा सकते हैं। उपयोग किए गए फूलों से बनाए खिलौनों को मेले में सेल्फ हेल्प ग्रुप सेवा भारती ने प्रदर्शित किया है। स्टाल चला रही मधू वंडराल ने बताया कि धार्मिक स्थानों पर फूलों की माला चढ़ाई जाती है। इसके बाद फूल खराब होने पर उन्हेें फेंक दिया जाता है। उनके ग्रुप ने इन फूलों को एकत्र कर इसके खिलौने बनाए हैं। इसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। रियासी में वह महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दे रही हैं।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सराहा
मेले के दौरान पर्यटन विभाग ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाए। इसमें गायकों ने हिन्दी, पंजाबी, डोगरी, पहाड़ी गीतों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। प्रसिद्ध गायक तिलक राज टगोत्रा ने डोगरी में पापा रेल गड्डी आई पर, पाहडे चे रेल गड्डी आई सुनाने पर पंडाल में बैठे लोगों ने तालियां बजाकर सराहा।