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रहें तो कैसे, दिलों में दहशत और घरों में दरार
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sun, 05 Oct 2014 12:57 AM IST
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जवाहर नगर और राजबाग इलाकों में मकानों के असुरक्षित हो जाने से अभी भी लोगों में बाढ़ का खौफ छाया हुआ है। इन इलाकों में भले ही पानी का स्तर कम हो गया हो, लेकिन भीषण बाढ़ ने अपने पीछे जो तबाही छोड़ी है, उसे सोचकर ही स्थानीय नागरिक सिहर जा रहे हैं।
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इन इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। इसके अलावा जो मकान बचे भी हैं, उनकी दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, जो रहने के काबिल नहीं है। इलाके में चारों तरफ मलबा और गंदगी बिखरा पड़ा है। जवाहर नगर के स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह के अनुसार, उनके मकान की दीवारें बाढ़ से गिर गई हैं।
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वह अपने मकान में रहने को सुरक्षित नहीं समझ रहे हैं। यही कारण है कि वह काफी दिनों से एक गुरुद्वारे में शरण लिए हुए हैं। उनके अनुसार इलाके के कई मकान रहने लायक नहीं है।
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वहीं एक अन्य स्थानीय मुजफ्फर अहमद के अनुसार, प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोगों के मकान सुरक्षित हो सके , ताकि लोग अपने मकानों में बिना डर के रह सके। उन्होंने कहा कि जब तक उनके मकान सुरक्षित नहीं घोषित होंगे, तब तक वह परिवार सहित अपने मकान में नहीं जाएंगे।