अफजल के अवशेष पर सियासत गरमाई, भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं
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संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु के अवशेषों को लेकर एक बार फिर देश में सियासी राजनीति गरमाने की तैयारी की जा रही है। घाटी आधारित पार्टियों नेकां तथा पीडीपी सहित इत्तेहाद अवाम पार्टी ने परिवार वालों को अवशेष सौंपने की मांग तो की है।
अब कांग्रेस ने भी इसमें कूदते हुए इस मुद्दे पर राजनीति शुरू कर दी है। मुंबई हमले के आरोपी याकूब मेनन की फांसी के बाद उसके परिवार वालों को अवशेष सौंपे जाने के बाद अफजल के अवशेषों को सौंपने की मांग करने वालों का तर्क है कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
यह कश्मीरियों के साथ भेदभाव है। ज्ञात हो कि अफजल को फांसी दिए जाने के बाद से ही उसके शव परिवार वालों को दिए जाने की मांग घाटी में लगातार उठती रही है।
भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
ताजा मामले में पीडीपी की ओर से भी शव सौंपने की वकालत किए जाने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कहा जा रहा है कि घाटी आधारित पार्टियां मांग कर कश्मीर में अपनी जमीन पुख्ता रखना चाहती हैं, साथ ही यह संदेश भी देना चाहती है कि वे इस मुद्दे पर गंभीर हैं।
उधर, अलगाववादियों ने भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। याकूब की फांसी के बाद घाटी में जबर्दस्त प्रदर्शनों के दौरान अफजल गुरु के परिवार वालों के साथ न्याय करने की मांग उठी। इसके पीछे घाटी के युवाओं को भड़काकर देश विरोधी गतिविधियों में झोंकने की साजिश की जा रही है।
नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर भी अवशेष सौंपने की मांग उठा चुके हैं। हालांकि, भाजपा का कहना है कि अफजल गुरु को फांसी तो यूपीए सरकार के ही समय दिया गया है तब यह मांग कांग्रेस ने क्यों उठाई।
अब जान बूझकर मुद्दे को हवा देने की कोशिश की जा रही है। उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह कहते हैं कि सभी मामलों को एक पलड़े पर नहीं तौलना चाहिए। देश की एकता-अखंडता से खिलवाड़ करने से बाज आना चाहिए।