पीडीपी का मासिक पत्र: मुसलमानों की स्थिति को चिंताजनक बताया, जेके पुलिस के कामकाज पर भी उठाए सवाल
पीडीपी ने अपने मासिक न्यूज लेटर स्पीक अप में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में भी देश के दूसरे हिस्सों की तरह मुसलमानों के साथ व्यवहार किया जा रहा है। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पीडीपी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के दो मजदूरों की हत्या के आरोप में इमरान को गिरफ्तार किया जाता है।
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीरी मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की कथित घटनाओं पर चिंता जाहिर की है। पीडीपी ने अपने मासिक न्यूज लेटर स्पीक अप में अखनूर की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि बजरंग दल के लोगों ने कॉलेज परिसर में नमाज पढ़ रहे लोगों को न सिर्फ धमकाया बल्कि उनकी चटाई व टोपी भी छीन ली।
अब जम्मू-कश्मीर में भी देश के दूसरे हिस्सों की तरह मुसलमानों के साथ व्यवहार किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए हम यह सवाल पूछ सकते हैं कि क्या एक कश्मीरी मुसलमान का जीवन खतरे में है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पीडीपी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के दो मजदूरों की हत्या के आरोप में इमरान को गिरफ्तार किया जाता है। उसके अगले दिन एक मुठभेड़ में वह क्रास फायरिंग में मारा जाता है।
पुलिस की यह कहानी सच्चाई से परे प्रतीत होती है। पीडीपी ने भारतीय जनता पार्टी के दावों को झुठलाते हुए कहा कि लक्षित हत्याओं की बाढ़ ने शोपियां और घाटी के अन्य हिस्सों में कश्मीरी पंडित परिवारों को जम्मू जाने के लिए मजबूर कर दिया है।
बागवानी कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सेब लदे ट्रक रोके जाने के कथित विरोध में सेब किसानों के अपनी फसल को जलाने के दृश्य घाटी की स्थिति का प्रतीक हैं।
सना मट्टू का भी जिक्र
न्यूजलेटर में पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाली कश्मीरी पत्रकार सना मट्टू का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कश्मीरी मुसलमानों को न केवल मौजूदा बल्कि उत्कृष्ट के लिए दंडित किया जा रहा है।