करोड़ों की गैस टरबाइन परियोजना बंद होने की कगार पर
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224 करोड़ की लागत से कश्मीर के पांपोर में गैस टरबाइन प्रोजेक्ट बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। 175 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता की गैस टरबाइन परियोजना की मशीनरी खराब हो चुकी है।
पिछले तीन सालों से यहां से उत्पादन तक नहीं हुआ। बिजली अधिकारियों की माने तो परियोजना बंद होने की कगार पर है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गैस टरबाइन परियोजना दो चरणों में तैयार हुई।
पहले चरण के तहत 1989 में 75 मेगावाट की गैस टरबाइन तैयार हुई और 1995 में दूसरे चरण के तहत 100 मेगावाट की गैस टरबाइन परियोजना को तैयार किया गया।
इस लिए लगाई गई थी यह परियोजना
सर्दियों में पन बिजली उत्पादन गिरने की वजह से रियासत में बिजली संकट जैसे हालात के दौरान डीजल से चलने वाली गैस टरबाइन परियोजना 224 करोड़ की लागत से लगाई गई लेकिन डीजल की कीमत के अनुसार लगभग 40 रुपये प्रति यूनिट बिजली उत्पादन होने से रियासती सरकार ने गैस टरबाइन परियोजना से धीरे धीरे अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए।
अब हालत यह हैं कि गैस टरबाइन की खराब मशीनरी तक को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है और परियोजना में तालाबंदी होने जैसे हालात बने हुए है। इस महंगी बिजली उत्पादन करने वाली गैस टरबाइन परियोजना को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों की राशि की दरकार है।
पांपोर में गैस टरबाइन परियोजना को बंद करने या बहाल करने की पूरी जानकारी नहीं है। अगर परियोजना रियासत के लिए लाभकारी हुई तो सरकार इसे बहाल करने का प्रयास करेगी। वह जल्द ही अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी हासिल करेंगे।
डा. निर्मल सिंह, उपमुख्यमंत्री जम्मू कश्मीर