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Pahalgam Terror Attack: आतंकी संगठन TRF ने हमले की ली जिम्मेदारी, शेख सज्जाद गुल है इसका आका, जानें सबकुछ

Tue, 22 Apr 2025 07:13 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 22 Apr 2025 07:13 PM IST
सार

टीआरएफ, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है। पाकिस्तान में बैठा शेख सज्जाद गुल टीआरएफ का प्रमुख है। जानें इस आतंकी संगठन के बारे में-

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Pahalgam Terror Attack Terrorist organization TRF took responsibility for attack
Pahalgam Attack - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाया। दो लोगों की मौत के साथ करीब 20 लोगों के घायल होने की सूचना है। आशंका है कि हमले में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है। यह हमला बायसरन घास के मैदानों के पास हुआ। आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। टीआरएफ, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है। पाकिस्तान में बैठा शेख सज्जाद गुल टीआरएफ का प्रमुख है। 

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कब सामने आया यह संगठन?
टीआरएफ की कहानी 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के साथ ही शुरू होती है। कहा जाता है कि इस हमले से पहले ही इस आतंकी संगठन ने घाटी के अंदर अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। धीरे-धीरे यह संगठन अपनी ताकत को बढ़ाता चला गया और इसे पाकिस्तान समर्थित कुछ आतंकी संगठनों के साथ खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी साथ मिला। पांच अगस्त 2019 को जैसे ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई, यह संगठन पूरे कश्मीर में सक्रिय हो गया। 

यह भी पढ़ें- Terrorist Attack in Pahalgam: बायसरन में आतंकियों ने पर्यटकों पर किया हमला, दो की मौत, करीब 20 घायल

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Pahalgam Terror Attack Terrorist organization TRF took responsibility for attack
Terrorist Attack in Pahalgam - फोटो : संवाद

कौन है टीआरएफ का आका?
टीआरएफ के सिर उठाने की असल कहानी पाकिस्तान से शुरू होती है। घाटी में बढ़ती आतंकी घटनाओं के साथ-साथ पाकिस्तान का छुपा चेहरा दुनिया के सामने आने लगा था। धीरे-धीरे पाकिस्तान पर अपने यहां पनप रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनता जा रहा था। पाक समझ चुका था कि उसे अब लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों पर कुछ कार्रवाई करनी ही होगी, लेकिन उसे यह भी डर था कि इससे कश्मीर में उसकी जमीन खिसक सकती है। ऐसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए तैयबा ने मिलककर नए आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की नींव रखी। 

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क्या है टीआरएफ का मकसद?
खास तौर पर टीआरएफ को फाइनेंसिशयल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कार्रवाई से बचने के लिए बनाया गया था। दरअसल, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में रखा था। इसके साथ ही उस पर कई प्रतिबंध भी लगाने शुरू कर दिए थे, जसके बाद टीआरएफ अस्तित्व में आया। इसका मकसद घाटी में फिर से 1990 वाला दौर वापस लाना है। टीआरएफ का मुख्य उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा मामले में पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव को कम करना व पाकिस्तानी में स्थानीय आतंकवाद को बढ़ावा देना है।

Pahalgam Terror Attack Terrorist organization TRF took responsibility for attack
आतंकी हमले के बाद कड़ी सुरक्षा - फोटो : संवाद

कैसे तय होता है टीआरएफ का शिकार?
आपने पहले भी कश्मीर में टारगेट किलिंग के कई मामले देखे होंगे। इनमें से अधिकतर के पीछे टीआरएफ का ही हाथ था। टीआरएफ के हैंडलर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही वे सोशल मीडिया पर कश्मीर के अंदर होने वाली हर राजनीतिक, प्रशासनिक व सामाजिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखते हैं। इसके जरिए यह संगठन अपने टारगेट को भी चुनता हैं। बीते दिनों टीआरएफ कई लोगों की हिटलिस्ट भी जारी कर चुका है। कई भाजपा नेता, सैन्य व पुलिस अधिकारी भी इस आतंकी संगठन के टारगेट पर रहते हैं। 

यह भी पढ़ें- Pahalgam Terror Attack: आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर मारी गोली, बिलखती पत्नी की बात सुन दहल जाएगा दिल

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