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Jammu News: पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान भेजी महिला को वापस लाने का आदेश
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जेएनएफ
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राहुल भारती ने केंद्र सरकार को हाल ही में पाकिस्तान भेजी गई एक महिला को वापस लाने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमानी खजूरिया और डीएसजीआई विशाल शर्मा की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने यह आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया गया है कि आदेश के पारित होने की तिथि से अगले 10 दिनों के भीतर आवश्यक अनुपालन किया जाए।
अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया था। साथ ही भारत छोड़ने का निर्देश दिया था। 27 अप्रैल को समयसीमा समाप्त होने के बाद अधिकारियों ने कई पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेज दिया।
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रक्षंदा राशिद भी इनमें से एक हैं। वह पिछले 38 वर्षों से अपने पति और दो बच्चों के साथ जम्मू में रह रही थीं और वर्तमान में लाहौर के एक होटल में फंसी हुई हैं।
अप्रैल में उन्होंने अपने निर्वासन के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें 30 अप्रैल को निर्वासित कर दिया गया था जिस दिन उनका मामला पहली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
न्यायमूर्ति राहुल भारती ने महिला के पति की दलील पर ध्यान दिया कि पाकिस्तान में उसका कोई नहीं है और वह कई बीमारियों से पीड़ित है। इसके बाद महिला को भारत वापस लाने का आदेश किया।
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कोर्ट ने यह भी की टिप्पणी
न्यायालय ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि उक्त महिला एक दीर्घकालिक वीजा (एलटीवी) के तहत भारत में रह रही थी। इसलिए उसकी दीर्घकालिक विदेशी नागरिकता के कारण उसे निर्वासित नहीं किया जा सकता।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राहुल भारती ने केंद्र सरकार को हाल ही में पाकिस्तान भेजी गई एक महिला को वापस लाने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमानी खजूरिया और डीएसजीआई विशाल शर्मा की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने यह आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया गया है कि आदेश के पारित होने की तिथि से अगले 10 दिनों के भीतर आवश्यक अनुपालन किया जाए।
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अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया था। साथ ही भारत छोड़ने का निर्देश दिया था। 27 अप्रैल को समयसीमा समाप्त होने के बाद अधिकारियों ने कई पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेज दिया।
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रक्षंदा राशिद भी इनमें से एक हैं। वह पिछले 38 वर्षों से अपने पति और दो बच्चों के साथ जम्मू में रह रही थीं और वर्तमान में लाहौर के एक होटल में फंसी हुई हैं।
अप्रैल में उन्होंने अपने निर्वासन के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें 30 अप्रैल को निर्वासित कर दिया गया था जिस दिन उनका मामला पहली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
न्यायमूर्ति राहुल भारती ने महिला के पति की दलील पर ध्यान दिया कि पाकिस्तान में उसका कोई नहीं है और वह कई बीमारियों से पीड़ित है। इसके बाद महिला को भारत वापस लाने का आदेश किया।
कोर्ट ने यह भी की टिप्पणी
न्यायालय ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि उक्त महिला एक दीर्घकालिक वीजा (एलटीवी) के तहत भारत में रह रही थी। इसलिए उसकी दीर्घकालिक विदेशी नागरिकता के कारण उसे निर्वासित नहीं किया जा सकता।