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Jammu News: सावन के पहले सोमवार पर पवित्र गुफा से शंकराचार्य मंदिर तक उमड़ा भक्तों का रेला
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श्रीनगर। सावन माह के पहले सोमवार पर पवित्र गुफा स्थित बाबा बर्फानी के दरबार के साथ ही श्रीनगर स्थित आदि शंकराचार्य मंदिर तक शिव भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। पहले सोमवार के दिन बाबा बर्फानी का दर्शन कर पुण्य कमाने की लालसा में बालटाल में भोर से ही श्रद्धालु लाइन में लग गए थे तो यहां श्रीनगर में आदि शंकरचार्य की पूूजा-अर्चना करने के लिए उमड़ पड़े थे। फल-फूल, जल, दूध-दही, भांग, शहद, धतूरा और बेल पत्र आदि चढ़ाकर भक्तों ने भोलेनाथ से दीर्घायु एवं निरोेग रहने के साथ ही मंगल की कामना की। परिसर हर हर महादेव से गूंजता रहा।
सावन का महीना शुरू हो गया है। ये पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। 14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार होने के नाते शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसमें भी श्रीनगर में दर्शनार्थियों की सर्वाधिक संख्या आदि शंकराचार्य मंदिर पर देखने को मिली। सुबह साढ़े सात बजे मंदिर का कपाट खुलता है लेकिन हल्की बूंदाबांदी होने के बावजूद श्रद्धालु सुबह करीब छह बजे से ही लाइन में लग गए थे। अयोध्या से पहुंचे रविंद्र गिरी ने बताया कि बाबा बर्फानी का दर्शन करने के बाद वह आदि शंकराचार्य का आशीष लेने आए हैं। सौभाग्यशाली हैं जो सावन के पहले सोमवार पर दर्शन करने का अवसर मिला।
कमोवेश यही कहना नासिक से आए अमरेंद्र और उनकी पत्नी सविता बाई का था। दोनों बताया कि माता वैष्णो देवी का दर्शन करने के बाद वह रविवार की श्रीनगर पहुंचे और डल झील में हाउसबोट में रुके। रात में ही तय कर लिया था कि श्रावण मास के पहले सोमवार को भोलेनाथ के साथ ही आदि शंकराचार्य का दर्शन करेंगे। यूपी के बुलंदशहर से पहुंचे अनिमेष ने बताया कि दोस्तों संग बाबा बर्फानी का दर्शन कर रविवार को श्रीनगर पहुंचे। सावन के पहले सोमवार को आदि शंकराचार्य मंदिर पर पूजा-अर्चना कर जीवन धन्य हो गया।
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रास्ते पर वाहनों की लाइन और मंदिर पर भक्तों की लगी रही कतार
डल झील के पास पहाड़ पर स्थित आदि शंकराचार्य के मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता हैै। सोमवार को नीचे से ऊपर तक पहुंचने के लिए बनी सड़क पर पर्यटकों के ट्रेवलर, मिनी बस और कार की लंबी लाइन लगी रही। सीआरपीएफ के जवान रास्ते में वाहनों को सुरक्षित किनारों पर खड़ा कराते रहे तो वहीं दूसरी तरफ दर्शन की लालसा में सैकड़ों भक्त लाइन में डटे रहे। हर-हर महादेव, बम-बम भोले और आदि शंकराचार्य की जय हो ... के जयकारे से घाटी गूंजती रही।
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सावन का महीना शुरू हो गया है। ये पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। 14 जुलाई को सावन का पहला सोमवार होने के नाते शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसमें भी श्रीनगर में दर्शनार्थियों की सर्वाधिक संख्या आदि शंकराचार्य मंदिर पर देखने को मिली। सुबह साढ़े सात बजे मंदिर का कपाट खुलता है लेकिन हल्की बूंदाबांदी होने के बावजूद श्रद्धालु सुबह करीब छह बजे से ही लाइन में लग गए थे। अयोध्या से पहुंचे रविंद्र गिरी ने बताया कि बाबा बर्फानी का दर्शन करने के बाद वह आदि शंकराचार्य का आशीष लेने आए हैं। सौभाग्यशाली हैं जो सावन के पहले सोमवार पर दर्शन करने का अवसर मिला।
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कमोवेश यही कहना नासिक से आए अमरेंद्र और उनकी पत्नी सविता बाई का था। दोनों बताया कि माता वैष्णो देवी का दर्शन करने के बाद वह रविवार की श्रीनगर पहुंचे और डल झील में हाउसबोट में रुके। रात में ही तय कर लिया था कि श्रावण मास के पहले सोमवार को भोलेनाथ के साथ ही आदि शंकराचार्य का दर्शन करेंगे। यूपी के बुलंदशहर से पहुंचे अनिमेष ने बताया कि दोस्तों संग बाबा बर्फानी का दर्शन कर रविवार को श्रीनगर पहुंचे। सावन के पहले सोमवार को आदि शंकराचार्य मंदिर पर पूजा-अर्चना कर जीवन धन्य हो गया।
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रास्ते पर वाहनों की लाइन और मंदिर पर भक्तों की लगी रही कतार
डल झील के पास पहाड़ पर स्थित आदि शंकराचार्य के मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता हैै। सोमवार को नीचे से ऊपर तक पहुंचने के लिए बनी सड़क पर पर्यटकों के ट्रेवलर, मिनी बस और कार की लंबी लाइन लगी रही। सीआरपीएफ के जवान रास्ते में वाहनों को सुरक्षित किनारों पर खड़ा कराते रहे तो वहीं दूसरी तरफ दर्शन की लालसा में सैकड़ों भक्त लाइन में डटे रहे। हर-हर महादेव, बम-बम भोले और आदि शंकराचार्य की जय हो ... के जयकारे से घाटी गूंजती रही।