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जमात के स्कूलों, मस्जिदों को सील करने के फैसले की तत्काल समीक्षा हो: उमर अब्दुल्ला
Sun, 03 Mar 2019 10:28 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 03 Mar 2019 10:28 PM IST
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उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध का कश्मीर में गहरा सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इसकी तरफ से संचालित स्कूलों तथा मस्जिदों को सील करने के फैसले की तत्काल समीक्षा करने की अपील की।
उमर ने ट्विटर पर लिखा कि जमात की राजनीतिक, धार्मिक भूमिका एक पहलू है, लेकिन इसका एक सामाजिक पहलू भी है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोग मस्जिदों से दूर हो गए हैं, जहां वे रोजाना प्रार्थना करते थे। स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे तथा शिक्षक भी सील कर दिए गए हैं। इसमें कोई सुझाव देने की बात नहीं है कि मस्जिदों को सील करने से सुरक्षा स्थिति में कोई सुधार होगा।
स्कूलों पर पाबंदी से उनके सड़कों पर निकलने का खतरा है। उन्होंने कहा कि बाद में इसकी समीक्षा की अपेक्षा स्कूलों पर प्रतिबंध और मस्जिदों को सील करने की तत्काल समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को कुछ मस्जिदों से वापस लौटा दिया गया।
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स्कूल जहां हजारों बच्चे और युवा पढ़ते थे और लोग रोजगार से जुड़े थे, उन पर ताले लगा दिए गए। यहां यह भी स्पष्ट नहीं है कि मस्जिदों को सील करने से माहौल में सुधार होगा। उधर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार की आलोचना की।
अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने प्रतिबंध से गलत परिणाम निकलने की बात कही। मीरवाइज ने ट्विटर पर लिखा कि यह सभी के लिए चिंता का विषय है। इस तरह के कदम केवल असंतोष बढ़ाएंगे। उधर कश्मीर चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने भी जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध किया है।
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उमर ने ट्विटर पर लिखा कि जमात की राजनीतिक, धार्मिक भूमिका एक पहलू है, लेकिन इसका एक सामाजिक पहलू भी है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोग मस्जिदों से दूर हो गए हैं, जहां वे रोजाना प्रार्थना करते थे। स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे तथा शिक्षक भी सील कर दिए गए हैं। इसमें कोई सुझाव देने की बात नहीं है कि मस्जिदों को सील करने से सुरक्षा स्थिति में कोई सुधार होगा।
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स्कूलों पर पाबंदी से उनके सड़कों पर निकलने का खतरा है। उन्होंने कहा कि बाद में इसकी समीक्षा की अपेक्षा स्कूलों पर प्रतिबंध और मस्जिदों को सील करने की तत्काल समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को कुछ मस्जिदों से वापस लौटा दिया गया।
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स्कूल जहां हजारों बच्चे और युवा पढ़ते थे और लोग रोजगार से जुड़े थे, उन पर ताले लगा दिए गए। यहां यह भी स्पष्ट नहीं है कि मस्जिदों को सील करने से माहौल में सुधार होगा। उधर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार की आलोचना की।
अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने प्रतिबंध से गलत परिणाम निकलने की बात कही। मीरवाइज ने ट्विटर पर लिखा कि यह सभी के लिए चिंता का विषय है। इस तरह के कदम केवल असंतोष बढ़ाएंगे। उधर कश्मीर चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने भी जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध किया है।