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लौट आएगा 90 का दशक!: कश्मीर की जगह अब जम्मू को दहलाने की साजिश, पॉलिसी शिफ्ट की रणनीति पर काम कर रहे आतंकी

Thu, 13 Jun 2024 10:21 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 13 Jun 2024 10:21 PM IST
सार

अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के इस्तेमाल किए हुए हथियारों के अलावा चीन निर्मित हथियारों से जम्मू-कश्मीर में दहशत फैलाने की साजिश रची जा रही है। कठुआ जिले के हीरानगर में सैडा सोहल गांव में मारे गए आतंकियों को पाकिस्तानी मदद का पूरी तरह से खुलासा हो चुका है।

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Now there is a conspiracy to terrorize Jammu instead of Kashmir terrorist organizations working on strategy of
कश्मीर की जगह अब जम्मू को दहलाने की साजिश - फोटो : PTI

विस्तार

कश्मीर में आतंकवाद पर सुरक्षाबलों के कड़े प्रहार के बाद आतंकी संगठनों ने अपना फोकस अब जम्मू संभाग पर कर दिया है। इसे पॉलिसी शिफ्ट का नाम दिया जा रहा है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने और लोगों में दहशत फैलाने की साजिश रची जा रही है। आतंकवाद से नब्बे के दशक में प्रभावित रहे इलाकों में दोबारा इसे जिंदा करने के लिए हमलों को अंजाम दिया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में राजोरी, पुंछ के बाद हालिया घुसपैठ से अब जम्मू संभाग के कठुआ, उधमपुर, रियासी और डोडा जिलों में भी आतंकियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए ये हमले हाल फिलहाल में किए हैं।

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सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, आतंकी ये बताना चाहते हैं कि उनकी मौजूदगी हर जिले में है। हालांकि इनको अब स्थानीय स्तर पर मदद नहीं मिल रही है और जंगलों में छिपकर घात लगाकर हमला कर रहे हैं। सुरक्षाबलों की ओर से लगातार इन इलाकों में सर्च ऑपरेशन भी चलाए जा रहे हैं।

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अफगानिस्तान से आए हथियार और चीन की मिल रही मदद
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के इस्तेमाल किए हुए हथियारों के अलावा चीन निर्मित हथियारों से जम्मू-कश्मीर में दहशत फैलाने की साजिश रची जा रही है। कठुआ जिले के हीरानगर में सैडा सोहल गांव में मारे गए आतंकियों को पाकिस्तानी मदद का पूरी तरह से खुलासा हो चुका है। आतंकियों से बरामद हुए सामान में जहां अमेरिकी सेना द्वारा पूर्व में अफगानिस्तान में इस्तेमाल की जाने वाली घातक एम4 कार्बाइन राइफल बरामद हुई है, वहीं चीन निर्मित पी 86 हैंडग्रेनेड ने चीनी मदद का भी खुलासा कर दिया है। ऐसी संभावना है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में नाटो की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले और छोड़ दिए गए हथियारों को इस्तेमाल भारतीय जमीन पर शांति भंग करने के लिए कर रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर में हालात खराब दिखाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज में बतौर एचओडी वर्ष 2013 से सेवाएं दे रहे डॉ. जे जगन्नाथ के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से आतंकियों की रणनीति जम्मू संभाग से इसी सीजन में घुसपैठ करने और इसके बाद कश्मीर घाटी तक सर्दियों से पहले मूव करने की रहती है। कठुआ जिले से अखनूर तक अंतरराष्ट्रीय सीमा में कई टनल हैं, जहां से आतंकी पूर्व में भी घुसपैठ करते रहे हैं। इस समय फोर्स मूव करती हैं यही वजह है कि पाकिस्तान आतंकियों को इसी समय घुसपैठ करवाने की फिराक में रहता है। 

पाकिस्तान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर में हालात खराब दिखाए जाएं और भारत को बातचीत के लिए मजबूर किया जाए। हाल फिलहाल में हुई यह घुसपैठ विभिन्न एजेंसियों पर भी सवाल खड़े करती है। बीएसएफ फ्रंटलाइन ऑफ कंट्रोल है, जिसे घुसपैठ रोकनी है, जबकि घुसपैठ के बाद इलाके में घूम रहे आतंकियों को लेकर स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की भी विफलता है। यह सीधे तौर पर इन एजेंसियों की एरिया डोमिनेंस की कमी को दर्शाता है। हालांकि हमारी सुरक्षा एजेंसियां इतनी सक्षम हैं कि देश के खिलाफ होने वाली किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। पिछले तीन चार साल से आतंकी हिंदू यात्रियों को टारगेट कर यह संदेश दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर सुरक्षित नहीं है।

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