संचार की नई तकनीक बनी आतंकियों का हथियार
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आतंकियों के हमला करने के सटीक इनपुट होने के बावजूद होने वाले आतंकी हमलों का कारण पता चल गया है। इंटरनेशनल बार्डर और एलओसी पर घुसपैठ करने के बाद आतंकी सेटेलाइट के माध्यम से एक नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस तकनीक से वे घुसपैठ करने के बाद अपने इर्द-गिर्द के दायरे में संचार नेटवर्क को जाम कर देते हैं। यही नहीं, आधा दर्जन आतंकी कठुआ से लेकर पुंछ तक घुसपैठ कर चुके हैं और गाइडों के पास पनाह लिए हुए हैं। जिनके निशाने पर सैन्य कैंप, पुलिस थाने और सैन्य स्कूल हैं।
खुफिया एजेंसियों के पास इसके इनपुट पहुंचे हैं। कई जगहों पर इनके होने की सूचना भी मिली है, लेकिन इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक की वजह से इनको पकड़ा नहीं जा पा रहा।
यही कारण है कि जानकारी होने के बाद भी आतंकी हमले हो रहे हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों और सेना एवं बीएसएफ के तकनीकी संचार ढांचे के लिए आतंकियों की नई तकनीक सिरदर्द बन रही है।
कैसे कर रहे तकनीक का इस्तेमाल
इंटरनेशनल बार्डर और एलओसी पर आतंकियों के लिए घुसपैठ करना आसान नहीं, लेकिन आतंकियों का जो भी प्रयास सफल हो रहा है, उसका वह पूरा फायदा उठा रहे हैं। घुसपैठ करने के बाद आतंकी जहां-जहां जाते हैं, वहां के दो सौ मीटर के दायरे का संचार नेटवर्क जाम कर देते हैं।
आतंकियों के पास सेटेलाइट से जुड़ी नई संचार तकनीक है, जो किसी भी संचार नेटवर्क को जाम कर देती है, लेकिन उनका संचार नेटवर्क निरंतर काम करता रहता है। इसका वह लाभ उठाकर हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
घुसपैठ के बाद आराम से कर रहे काम
कठुआ और सांबा जिले में छह आतंकी पिछले दिनों घुसपैठ करके आए थे। इनमें से चार को कठुआ और सांबा में आतंकी हमले मे मारा गया। सूत्रों का कहना है कि बचे हुए दो आतंकी पुंछ के मेंढर तक पहुंचे हुए हैं, जो ट्रेस नहीं हो पा रहे।
इसी तरह से पुंछ के ही चंडीमढ़, मुगल रोड पर दो आतंकी जंगलों में पनाह लिए हुए हैं। पिछले बीस दिनों से इन आतंकियों की मौजूदगी है। इनमें एक आतंकी पाकिस्तानी है और दूसरा स्थानीय। वहीं मंगलवार को नौशेरा के लंबैड़ी में चार संदिग्धों को देखा गया।
इनके पास पिट्ठू बैग थे। इनकी तलाश में सर्च आपरेशन चलाया गया, लेकिन पहचान नहीं हो सकी। करीब एक महीना पहले भी अखनूर सेक्टर से दो आतंकियों ने घुसपैठ की थी, जिनका पता नहीं चल पाया।