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जम्मू-कश्मीरः एसपीओ की कांस्टेबल पद पर नियुक्ति पर सरकार को नोटिस, जनहित याचिका दाखिल

Mon, 13 Jul 2020 05:34 PM IST
प्रशांत कुमार एजेंसी, जम्मू
एजेंसी, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 13 Jul 2020 05:34 PM IST
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Notice to the government on the appointment of SPO as constable in Jammu and Kashmir
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने 2018 से मार्च 2020 तक विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) की सिपाहियों के तौर पर कथित गैरकानूनी नियुक्ति की सीबीआई जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है। 

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न्यायमूर्ति अली मोहम्मद मागरे और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील सालेह पीरजादा को सुनने के बाद इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य सचिव, प्रधान सचिव गृह, डीजीपी और एसएसपी अनंतनाग को नोटिस जारी किया। अब इस मामले की चार अगस्त को सुनवाई होगी।
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जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनंतनाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने डीजीपी के साथ मिलकर दैनिक आधार पर मिलने वाले वेतन पर काम कर रहे एसपीओ को पुलिस विभाग में सिपाहियों के तौर पर नियुक्त किया। यह एसपीओ हाई प्रोफाइल अधिकारियों के साथ काम कर रहे थे या फिर पुलिस अफसर व अधिकारियों के घर पर सेवाएं दे रहे थे।

उन्हें दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम जिलों में नियुक्त किया गया। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि एसपीओ में से सिपाहियों के पदों की इस तरीके से भर्ती करना गैरकानूनी और निष्पक्ष भर्ती की भावना के खिलाफ है।


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अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग में सांठगांठ है। उसने दावा किया कि पुलिस विभाग ने इन सिपाहियों के आदेश न तो अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए जो डीजीपी और एसएसपी की ओर से द्वेषपूर्ण और मनमाना फैसला है और न ही ऐसी सूची जारी की गई कि नियुक्त किए गए ये लोग मूल रूप से एसपीओ के तौर पर काम कर रहे थे।

याचिकाकर्ता को सुनने के बाद खंडपीठ ने नोटिस जारी किए और प्रतिवादियों को चार अगस्त को मामले की अगली सुनवाई से पहले जवाब देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने 2018 से मार्च 2020 तक की गई नियुक्तियों की सूची भी कोर्ट में जमा करने का अनुरोध किया है।

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