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इंटरव्यू: तुर्किये बना नई चुनौती, नौगाम ब्लास्ट से कार बम साजिश तक, नरेंद्र धर ने खोले आतंकी नेटवर्क के कई राज

Tue, 18 Nov 2025 12:30 PM IST
निकिता गुप्ता रोली खन्ना, अमर उजाला
रोली खन्ना, अमर उजाला Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 18 Nov 2025 12:30 PM IST
सार

पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ धर ने अपने इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्किये भी भारत विरोधी आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और कश्मीर हाउस व इस्तांबुल से मिलने वाले निर्देशों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने 32 कार बम साजिश, डॉक्टरों की संदिग्ध यात्राओं और भारी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट बरामद न होने को आतंकी नेटवर्क की व्यापकता का संकेत बताया।

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Not only Pakistan, Turkey is also posing a challenge for India, says former BSF DIG
नरेंद्र नाथ धर, बीएसएफ के पूर्व डीआईजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान ही नहीं, तुर्किये भी भारत के लिए चुनौती बन रहा है। हमें कश्मीर के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है। कश्मीरी अमेरिकन काउंसिल के सरबराह कश्मीर मूल के अमेरिकी नागरिक गुलाम नबी फई पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। यह कहना है बीएसएफ के पूर्व डीआईजी नरेंद्र नाथ धर का। संसद पर हमले के मास्टरमाइंड आतंकी गाजी बाबा को पकड़ने के अभियान का नेतृत्व नरेंद्र धर ने ही किया था। ग्राउंड जीरो फिल्म उन्हीं की कहानी और बहादुरी पर आधारित है। लाल किले के पास कार ब्लास्ट, सफेदपोश आतंकी माॅड्यूल, ऑपरेशन सिंदूर 2.0 सहित कश्मीर के संवेदनशील हालात पर उन्होंने रोली खन्ना से चर्चा की।

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नरेंद्र नाथ धर 1994 से 1997 तक पुलवामा अनंतनाग में, 2000-2003 तक श्रीनगर डाउनटाउन सिटी में तैनात रहे। 2009-2019 तक एनआईए का हिस्सा रहे और दक्षिण कश्मीर में विभिन्न मामलों को देखा। संसद हमले का आरोपी गाजी बाबा व अन्य दो आतंकियों के खिलाफ 2003 में चले ऑपरेशन का नेतृत्व किया।

आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में इस्तांबुल का भी रहा है बड़ा रोल
रेंद्र नाथ धर कहते हैं कि यह नहीं भूलना चाहिए कि तुर्किये में एक कश्मीर हाउस भी है और अलगाववादियों को वहां से निर्देश मिलते हैं। आतंकी घटनाओं को किस तरह से अंजाम देना है इसमें इस्तांबुल का भी बड़ा रोल है। इस बार साजिश को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान ने तुर्किये को केंद्र बनाया है।

जिस दिन ये पता चल जाएगा कि हैंडलर कौन था? कहां बैठा है और ये सब किसके निर्देश से संचालित हो रहा है तब सबकुछ साफ हो जाएगा। इसके बाद भारत इसका बाकायदा एलान करेगा। कई चीजें अभी स्पष्ट रूप से पब्लिक डोमेन में नहीं दिख रही हैं और मेरा मानना है कि दिखनी भी नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने के तुरंत बाद आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। इससे पाकिस्तान के तार साफ जुड़ गए थे और उसके खिलाफ तत्काल एक्शन लेना आसान हो गया था। दिल्ली में आत्मघाती कार धमाके और उसके कश्मीर से जुड़े तार से जगजाहिर है लेकिन अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

मुमकिन है कि जिम्मेदारी लेने से ये बचें भी। इसका अर्थ यह नहीं है कि इसके तार पाकिस्तान से नहीं जुड़े हैं। जांच एजेंसियां अब तुर्किये पर निगाह केंद्रित कर रही हैं क्योंकि उसका तार पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। दोनों में बहुत भाईचारा है। दो डॉक्टरों का तुर्किये जाना और वहां कई दिन रुकना यह सब इत्तफाक नहीं है। इसकी गहराई तक जाना होगा।

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बौखलाये पाकिस्तान ने आर्मी, नेवी व एयरफोर्स तैयार कर रखा
पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही बौखलाया है। उसने अपनी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को अलर्ट मोड पर रखा है। भारत भी तैयार है। साजिश करने वालों की कुंडली खुलेगी। मस्जिदों के इमाम व कट्टरपंथी विचारधारा को चलाने वाले भी रडार पर हैं।

जहां-जहां से कनेक्शन जुड़ रहा है, सब सामने आएगा। एक खास इलाके से निकले तमाम जगहों पर फैले डॉक्टरों के पूरे बैच की जांच पड़ताल में पूरा का पूरा आतंकी माॅड्यूल सामने आएगा। इसके बाद भारत का एक्शन देखने वाला होगा।

32 गाड़ियों को कार बम बनाना था, 30 का अभी पता नहीं
सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 300 किग्रा अमोनियम नाइट्रेट अब तक बरामद नहीं हुआ है। 32 कारों से धमाके करने की साजिश थी। हर कार में एक-एक क्विंटल विस्फोटक रखना था। सिर्फ दो कारों का ही पता चला है। बाकी 30 कहां हैं।

ऑपरेशनल जानकारियों का बड़ा स्रोत डॉ. उमर नबी था। कार विस्फोट में उसकी मौत के साथ बड़े सुराग दफन हो गए। डॉ. शाहीन के पास उसकी कट्टरता की वैचारिक जानकारी हो सकती है। मुजम्मिल और आदिल इसके खास दोस्त हैं। 

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नौगाम विस्फोट: जखीरा वहीं नष्ट करना चाहिए था
नौगाम पुलिस थाने ने 19 अक्तूबर से जैश के पोस्टर को नजरअंदाज नहीं किया। पूरे नेटवर्क को 10-12 दिन में सामने ला दिया। अमोनियम नाइट्रेट का जखीरा फरीदाबाद में ही नष्ट कर देना चाहिए था।

एक दिन में तो नहीं जुटाया 2900 किलो विस्फोटक
2900 किलो से अधिक अमोनियम नाइट्रेट एक दिन में तो इकट्ठा नहीं हुआ होगा। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट को कैसे स्टोर कर लिया गया।

रेडिकलाइजेशन: स्क्रूटनी करनी होगी
कश्मीर में आतंकवाद 1989 में शुरू हुआ। मेरा मानना है कि डॉ. उमर की पैदाइश लगभग उसी समय की होगी। लाल किला पर कार ब्लास्ट बहुत बड़ी घटना है। हमें चौकन्ना रहना होगा। रेडिकलाइजेशन को अब रडार पर लेना होगा। धार्मिक केंद्रों की निगरानी जरूरी है।

घाटी में सुरक्षा बढ़ानी होगी
घाटी में सुरक्षा बढ़ानी होगी। आईएसआई चीफ का बांग्लादेश जाना, 40 हजार लोगों का बांग्लादेश में रेडिकलाइज्ड करना, 10 हजार रोहिंग्याओं का ब्रेनवाॅश करना भी खतरे की घंटी है। 

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