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Jammu News: मुख्य सचिव साहब, शालीन काबरा पार्षदों का नहीं उठाते फोन
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राशन कार्ड, पेंशन सहित कई अन्य मुद्दों की भी शिकायतें की, 25 पार्षदों के दल ने मुख्य सचिव को सुनाया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जलशक्ति विभाग के आयुक्त सचिव शालीन काबरा नगर निगम के पार्षदों का फोन तक नहीं उठाते। यदि आयुक्त सचिव चुने हुए लोगों के नुमाइंदों का फोन नहीं उठाते, तो वह आम जनता का फोन क्या उठाएंगे। यह शिकायत जम्मू नगर निगम के मेयर राजिंदर शर्मा और उनके साथ 25 पार्षदों ने मुख्य सचिव अरुण मेहता से की है। शुक्रवार को इन पार्षदों का दल राजिंदर की अध्यक्षता में मुख्य सचिव से मिला। मेयर ने लोगों के राशन कार्ड न बनने का मामला भी उठाया। कई अन्य मामलों को भी उठाया गया है।
मेयर ने मुख्य सचिव को बताया कि आयुक्त सचिव शालीन काबरा कभी भी फोन नहीं उठाते हैं, जबकि बाकी के सभी विभागों के आयुक्त सचिव अच्छे से बात करते हैं। कहा कि यदि वह लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को जवाब नहीं देंगे, तो किसको जवाब देंगे। वहीं पार्षदों ने पेंशन से संबंधित मामलों को उठाया। बताया कि समाज कल्याण विभाग से पेंशन प्राप्त करने के लिए आय प्रमाण पत्र की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है, लेकिन पेंशन हासिल करने वाले आय शून्य रहती है। इससे एक ओर ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकरण की विश्वसनीयता समाप्त होती है, दूसरी ओर ऐसे प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति की सत्यनिष्ठा संदिग्ध रहती है। यह भी कहा कि आज एकल परिवारों में बूढ़े माता-पिता की देखभाल बच्चों द्वारा नहीं की जाती है और राशन कार्ड में माता-पिता और बच्चों के नाम एक साथ होते हैं। बच्चे कमाते हैं और अपने मां-बाप को कुछ नहीं देते। यदि माता-पिता पेंशन चाहते हैं, तो उन्हें राशन कार्ड की आवश्यकता होती है। इसके लिए राशन कार्ड की बाइफरकेशन नहीं हो रही। पेंशन के लिए प्राथमिकता वाले घरों की श्रेणी वाले राशन कार्ड चाहिए होते हैं, जबकि एक हजार रुपये की पेंशन के लिए इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। विधवा पेंशन के लिए भी इस श्रेणी का राशन कार्ड मांगा जाता है। यदि निम्न मध्यवर्गीय परिवार में कोई विधवा हो जाती है, तो वह अपने पास प्राथमिकता वाले घर राशन कार्ड न होने के कारण पेंशन की पात्र नहीं होगी। इसलिए इस श्रेणी को पेंशन के मामलों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि राशन कार्ड में आय का स्लैब ज्यादातर गलत लिखा होता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गोपनीयता के लिए 36 जासूसों का पलटन देने की मांग
मेयर ने निगम के संचालन में गोपनीयता बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों (एसएफ) के 36 जासूसों का एक पलटन देने की मांग की। कहा कि वर्तमान में संचालन के लिए एसएसपी से बल के लिए संपर्क किया जाता है और इससे उनके संचालन की गोपनीयता बनाए नहीं रखी जाती है। इसलिए निगम के पास अपनी सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड समितियों का चुनाव 74वें संशोधन के अनुसार होना चाहिए, जिसके तहत प्रत्येक 2000 लोगों पर एक प्रतिनिधि चुना जाता है। इसके लिए वह मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दें।
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पर्याप्त फंड न होने का मामला भी उठाया
आगामी बरसात के सीजन में नालों की सफाई के लिए निगम के पास पर्याप्त फंड न होने का मामला भी उठाया। कहा कि हमारे पास गैर योजना में 88 करोड़ हैं, इन्हें खर्च करने की अनुमति देनी चाहिए। शहर के पांचवीं तक के स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्र निगम को सौंपने के लिए भी कहा, ताकि पब्लिक क्लीनिक खोले जा सकें। उन्होंने कहा कि निगम के कार्यपालक अभियंताओं के पास आहरण और वितरण अधिकार नहीं हैं, जिसके कारण निगम आयुक्त और मुख्य लेखा अधिकारी का अनावश्यक और अधिक बोझ बना रहता है, जबकि अन्य विभागों में आहरण और संवितरण शक्ति कार्यकारी अभियंताओं के पास होती है और वे ठेकेदारों के बिलों का भुगतान भी करते हैं, लेकिन अभी यह अधिकार आयुक्त के पास ही है। एक दिन में आयुक्त हर रोज एक करोड़ के बिल कैसे क्लीयर कर सकते हैं। इसलिए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को इसके अधिकार मिलें। अमृत 2 का पैसा जल्द जारी करने की मांग भी की।
मुख्य सचिव, आयुक्त सचिव का नहीं आया कोई जवाब
मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता और जलशक्ति विभाग के आयुक्त सचिव शालीन काबरा से इस मामले में बात करने की कोशिश की गई, ताकि उनका पक्ष लिया जा सके। इसके लिए उन्हें फोन किया। उनके व्हाटसएप और नंबर पर संदेश भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। हम उनसे मेयर के लगाए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष रखना चाहते थे। वह जब भी इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे, हम उसे प्राथमिकता के साथ प्रकाशित करेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जलशक्ति विभाग के आयुक्त सचिव शालीन काबरा नगर निगम के पार्षदों का फोन तक नहीं उठाते। यदि आयुक्त सचिव चुने हुए लोगों के नुमाइंदों का फोन नहीं उठाते, तो वह आम जनता का फोन क्या उठाएंगे। यह शिकायत जम्मू नगर निगम के मेयर राजिंदर शर्मा और उनके साथ 25 पार्षदों ने मुख्य सचिव अरुण मेहता से की है। शुक्रवार को इन पार्षदों का दल राजिंदर की अध्यक्षता में मुख्य सचिव से मिला। मेयर ने लोगों के राशन कार्ड न बनने का मामला भी उठाया। कई अन्य मामलों को भी उठाया गया है।
मेयर ने मुख्य सचिव को बताया कि आयुक्त सचिव शालीन काबरा कभी भी फोन नहीं उठाते हैं, जबकि बाकी के सभी विभागों के आयुक्त सचिव अच्छे से बात करते हैं। कहा कि यदि वह लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को जवाब नहीं देंगे, तो किसको जवाब देंगे। वहीं पार्षदों ने पेंशन से संबंधित मामलों को उठाया। बताया कि समाज कल्याण विभाग से पेंशन प्राप्त करने के लिए आय प्रमाण पत्र की अनिवार्य रूप से आवश्यकता होती है, लेकिन पेंशन हासिल करने वाले आय शून्य रहती है। इससे एक ओर ऐसे प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकरण की विश्वसनीयता समाप्त होती है, दूसरी ओर ऐसे प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति की सत्यनिष्ठा संदिग्ध रहती है। यह भी कहा कि आज एकल परिवारों में बूढ़े माता-पिता की देखभाल बच्चों द्वारा नहीं की जाती है और राशन कार्ड में माता-पिता और बच्चों के नाम एक साथ होते हैं। बच्चे कमाते हैं और अपने मां-बाप को कुछ नहीं देते। यदि माता-पिता पेंशन चाहते हैं, तो उन्हें राशन कार्ड की आवश्यकता होती है। इसके लिए राशन कार्ड की बाइफरकेशन नहीं हो रही। पेंशन के लिए प्राथमिकता वाले घरों की श्रेणी वाले राशन कार्ड चाहिए होते हैं, जबकि एक हजार रुपये की पेंशन के लिए इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। विधवा पेंशन के लिए भी इस श्रेणी का राशन कार्ड मांगा जाता है। यदि निम्न मध्यवर्गीय परिवार में कोई विधवा हो जाती है, तो वह अपने पास प्राथमिकता वाले घर राशन कार्ड न होने के कारण पेंशन की पात्र नहीं होगी। इसलिए इस श्रेणी को पेंशन के मामलों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि राशन कार्ड में आय का स्लैब ज्यादातर गलत लिखा होता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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गोपनीयता के लिए 36 जासूसों का पलटन देने की मांग
मेयर ने निगम के संचालन में गोपनीयता बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों (एसएफ) के 36 जासूसों का एक पलटन देने की मांग की। कहा कि वर्तमान में संचालन के लिए एसएसपी से बल के लिए संपर्क किया जाता है और इससे उनके संचालन की गोपनीयता बनाए नहीं रखी जाती है। इसलिए निगम के पास अपनी सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड समितियों का चुनाव 74वें संशोधन के अनुसार होना चाहिए, जिसके तहत प्रत्येक 2000 लोगों पर एक प्रतिनिधि चुना जाता है। इसके लिए वह मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दें।
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पर्याप्त फंड न होने का मामला भी उठाया
आगामी बरसात के सीजन में नालों की सफाई के लिए निगम के पास पर्याप्त फंड न होने का मामला भी उठाया। कहा कि हमारे पास गैर योजना में 88 करोड़ हैं, इन्हें खर्च करने की अनुमति देनी चाहिए। शहर के पांचवीं तक के स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्र निगम को सौंपने के लिए भी कहा, ताकि पब्लिक क्लीनिक खोले जा सकें। उन्होंने कहा कि निगम के कार्यपालक अभियंताओं के पास आहरण और वितरण अधिकार नहीं हैं, जिसके कारण निगम आयुक्त और मुख्य लेखा अधिकारी का अनावश्यक और अधिक बोझ बना रहता है, जबकि अन्य विभागों में आहरण और संवितरण शक्ति कार्यकारी अभियंताओं के पास होती है और वे ठेकेदारों के बिलों का भुगतान भी करते हैं, लेकिन अभी यह अधिकार आयुक्त के पास ही है। एक दिन में आयुक्त हर रोज एक करोड़ के बिल कैसे क्लीयर कर सकते हैं। इसलिए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को इसके अधिकार मिलें। अमृत 2 का पैसा जल्द जारी करने की मांग भी की।
मुख्य सचिव, आयुक्त सचिव का नहीं आया कोई जवाब
मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता और जलशक्ति विभाग के आयुक्त सचिव शालीन काबरा से इस मामले में बात करने की कोशिश की गई, ताकि उनका पक्ष लिया जा सके। इसके लिए उन्हें फोन किया। उनके व्हाटसएप और नंबर पर संदेश भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। हम उनसे मेयर के लगाए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष रखना चाहते थे। वह जब भी इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे, हम उसे प्राथमिकता के साथ प्रकाशित करेंगे।