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घाटी में बेअसर हुआ अलगाववाद का आह्वान, बंद में भी गुलजार दिखा श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Mon, 28 Nov 2016 09:35 PM IST
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श्रीनगर में सड़कों पर दिखी चहल पहल
- फोटो : File Photo
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कश्मीर घाटी में पिछले करीब चार महीने से अधिक समय से चल रहे बंद की उबाऊ अलगाववादियों के मंसूबों पर भारी पड़ रही है। श्रीनगर सहित अन्य इलाकों में अलगाववादियों ने शनिवार को दो दिन की ढील दी थी।
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सोमवार को ढील खत्म हो गई, लेकिन अलगाववादियों के कैलेंडर में प्रस्तावित बंद सोमवार को बेअसर साबित हुआ। दिन भर सड़कों पर निजी वाहनों की आवाजाही रही। बाजारों में पहले से चहल-पहल बढ़ी है।
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शनिवार और रविवार को अलगाववादियों ने बंद में ढील दी थी। इससे घाटी सहित अन्य इलाकों में जनजीवन सामान्य दिनों जैसा हो गया। बाजारों में रौनक गुलजार हुई और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही हुई। सोमवार को चूंकि कैलेंडर के मुताबिक बंद रखा गया था, लेकिन सड़कों पर ट्रैफिक जाम के नजारे भी देखने को मिले।
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सामान्य रूप से आयोजित हुई बोर्ड परीक्षाएं
बोर्ड परीक्षा देकर निकलती छात्राएं
- फोटो : फाइल फोटो
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आज सड़कों पर प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी दौड़ता दिखाई दिया, जिसमें काफी ज्यादा संख्या में ऑटो, टैक्सी कैब, मेटाडोर आदि भी शामिल थी। स्थानीय निवासी जहूर हुसैन के अनुसार लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए निकले हैं। उनका कहना था कि आखिर कब तक कोई बंद का पालन करेगा।
उन्होंने कहा कि भुखमरी से मरने जैसे हालात और बर्दाश्त नहीं हो सकते। गौरतलब है कि इन दिनों दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान खुलने लगे हैं। स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं भी सामान्य रूप से आयोजित हुईं। यह सब देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि घाटी के लोग कहीं न कहीं बंद के चलते दुखी हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भुखमरी से मरने जैसे हालात और बर्दाश्त नहीं हो सकते। गौरतलब है कि इन दिनों दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान खुलने लगे हैं। स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं भी सामान्य रूप से आयोजित हुईं। यह सब देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि घाटी के लोग कहीं न कहीं बंद के चलते दुखी हो चुके हैं।