जम्मू-कश्मीर में टल सकते हैं विधानसभा चुनाव
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घाटी में आई बाढ़ का असर यहां होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ा है। राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव फिलहाल टल गए हैं। चुनाव आयोग ने हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी लेकिन रियासत के बारे में फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया।
ऐसे में अब चुनाव न हुए तो अप्रैल से पहले घाटी में विधानसभा चुनाव होना संभव नहीं दिखाई देता। वहीं इसके साथ्ा ही रियासत में राष्ट्रपति शासन लगने के आसार भी बनते दिख रहे हैं।
चुनाव आयोग ने फिलहाल जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनावों की घोषणा नहीं की है। जबकि हरियाणा और महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही रियासत में भी चुनावों की उम्मीद की जा रही थी।
अक्टूबर में पूरा होना है विधानसभा का समय
लेकिन घाटी में आई बाढ़ के बाद हालात विकट हो गए हैं जिनसे उबरने में कम से कम छह माह का समय लग जाएगा। ऐसे में अब अप्रैल के बाद ही रियासत में चुनावों की संभावना दिखाई देती है।
क्योंकि नंवबर दिसंबर के बाद घाटी में भारी बर्फबारी शुरू हो जाती है, ऐसे में उस समय चुनाव कराना यहां आसान नहीं होगा। हालांकि पिछले कुछ दिनों से इस बात की संभावना बनने लगी थी कि विधानसभा चुनाव पीछे हटाए जा सकते हैं।
राजनीतिक दलों में भी इसको लेकर सुगबुगाहट तेज थी। लेकिन शुक्रवार को चुनाव आयोग की घोषणा के बाद सारी स्थिति साफ हो गई। चुनाव आयोग ने हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनावों को लेकर तारीखों की घोषणा तो की लेकिन जम्मू कश्मीर के संबंध में कोई जिक्र नहीं किया।
घाटी में लगाया जा सकता है राष्ट्रपति शासन
साफ है कि घाटी में बाढ़ के चलते बिगड़े हालातों के मद्देनजर फिलहाल यहां चुनाव करा पाने की उम्मीद उसे भी नहीं लग रही थी। हालांकि चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने भी कसरते तेज कर दी थी लेकिन पहले बाढ़ और अब चुनाव आयोग ने सारी कवायद पर लगाम लगा दी।
जानकारों की मानें तो फिलहाल चुनाव टलने के बाद अप्रैल से पहले चुनाव होने की उम्मीद किसी हाल में नहीं दिखाई देती। क्योंकि अक्टूबर के बाद आयोग नवंबर दिसंबर से पहले चुनावों की घोषणा करेगा नहीं और उस दौरान घाटी में बर्फबारी शुरू हो जाती है जो मार्च-अप्रैल तक जारी रहती है।
वहीं अक्टूबर तक चुनाव न होने के बाद घाटी में राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है क्योंकि मौजूदा विधानसभा का समय अक्टूबर में पूरा हो रहा है। जिसके बाद सवैंधानिक रूप से इसे जारी रखना संभव नहीं है।