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‘ना’ पाक इरादों पर जम्हूरियत का तमाचा

Tue, 09 Dec 2014 10:02 PM IST
Updated Tue, 09 Dec 2014 10:02 PM IST
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news story on third phase jammu kashmir assembly election

30 वर्षीय वसीम फिरोज अपने पैरों पर चल नहीं पाते। कुदरत की निर्मम खरोंच ने इन्हें बचपन में ही अपंग बना दिया था। कदम कमजोर हुए, लेकिन, बुंलद हौसले के बूते एमए बीएड किया। तिपहिए के सहारे मतदान केंद्र तक पहुंचे वसीम ने जम्हूरियत की मजबूती के लिए मतदान किया। उन्हें वोट की अहमियत का अहसास है।

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वसीम कहते हैं कि आतंकी और अलगाववादी विकास रथ के पहिए को रोकने की कोशिश में बेनकाब हो चुके हैं। वसीम ने रोजगार की आस पूरी होने के लिए वोट डाला। इसी तरह कश्मीर घाटी की सभी 16 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं ने जम्हूरियत के जश्न में बढ़-चढ़कर शिरकत की। दिन भर कश्मीरी उम्मीदें वोट की शक्ल में ईवीएम मशीनों पर दर्ज होती रहीं।
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बदन पर फिरन और उसके अंदर गले से लटकती कांगड़ी। सर्द हवा भी वोटरों के जोश से हार गई। मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतारबद्घ होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। युवा मतदाताओं का जोश उबाल ले रहा था। महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंची। बुजुर्ग भी मौका चूकना नहीं चाहते थे।
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मतदान केंद्र दुल्हन की तरह सजे

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गोंदीपोरा के माडल मतदान केंद्र को दुल्हन की तरह सजाया गया था। रंग-बिरंगे झंडे और रंगीन झालरें लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व पर मेले का माहौल पैदा करते नजर आए। माडल केंद्रों पर वोटरों के लिए चाय-पानी का भी इंतजाम किया गया था। महिलाओं के लिए बैठने और शौचालय का भी प्रबंध था।

तीन दिन पहले आतंकियों ने उड़ी के सैन्य शिविर समेत चार स्थानों पर सिरियल हमले किए थे। अलगाववादियों ने मतदान के दिन हड़ताल का एलान कर वोटरों को भयभीत करने की कोशिश की, लेकिन, मतदाताओं के उत्साह के आगे नापाक कोशिशों को घुटने टेकने पड़ गए। बडगाम से बीरवाह तक हर मतदान केंद्र वोटरों की लंबी कतारों का गवाह बना।

मुख्यमंत्री उमर बीरवाह सीट से प्रत्याशी हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के नजीर अहमद और पीडीपी के शफी अहमद वानी से है। पिछले चुनाव में यहां 57.17 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार उत्साह से लबरेज वोटरों ने पिछला रिकार्ड तोड़ने का जज्बा दिखाया।

खराब सड़कें भी नहीं रोक पाई लोकतंत्र के जोश को

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श्रीनगर से बडगाम तक की सड़क कुछ अच्छी हालत में है, लेकिन, बडगाम से बीरवाह का रास्ता गड्ढों से भरा है। पर युवा वोटर निराश नहीं हैं।  बडगाम के बीडीओ दफ्तर के मतदान केंद्र पर वोट डालने आए मंजूर अहमद और गुलाम अहमद को उम्मीद है कि आगे अच्छी सरकार बनेगी और कस्बे की समस्याओं का हल निकल आएगा।

चंदपोरा के शौकत अहमद ने कहा कि मतदान का प्रतिशत कम भी रहे तब भी सरकार बन ही जाती है। नुकसान तो अवाम का होता है जो अपनी मर्जी का नुमाइंदा चुनने से चूक जाते हैं। फिर छह साल तक पछतावा होता है। लिहाजा, इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता। हक के इस्तेमाल से ही कश्मीर का तकदीर बदलेगी।
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